ऊर्जाधानी में शीतलहर का कहर, सूर्य देव के नही हुये दर्शन, ठंड ने तोड़ा रिकॉर्ड
मौसम विभाग के अनुसार दिन शनिवार को अधिकतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट बनी रही। शहर के मुकाबले ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में ठंड का असर कहीं ज्यादा गंभीर नजर आया। चितरंगी, देवसर, सरई, बैढ़न के बाहरी क्षेत्र, समिति एवं आसपास के ग्रामीण अंचलों में न्यूनतम तापमान 4 से 7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। सुबह और देर रात घना कोहरा व बर्फीली हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। शीतलहर का सबसे ज्यादा असर गरीब, मजदूर वर्ग, बुजुर्गों और बच्चों पर देखने को मिल रहा है। ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में लोग खुले या अस्थायी आवासों में रहने को मजबूर हैं। पर्याप्त गर्म कपड़ों और अलाव की व्यवस्था न होने से रात काटना दूभर हो गया है। कई स्थानों पर लोग प्लास्टिक, लकड़ी और कचरे से अलाव जलाकर ठंड से बचाव करते नजर आए।
ठिठुरन भरी ठण्ड से पशुपालको को भी चिंता
ठंड का प्रकोप सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। मवेशी भी ठंड से बेहाल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के लिए न तो शेड की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही चारे-पानी का समुचित इंतजाम। ठंड के कारण कई स्थानों पर मवेशियों के बीमार पड़ने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि शीतलहर के इस दौर में प्रशासनिक तैयारियां बेहद कमजोर नजर आ रही हैं। रैन बसेरों की संख्या सीमित है और वहां भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों में अलाव की व्यवस्था नाममात्र की है, जबकि ठंड लगातार बढ़ रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते आने वाले कुछ दिनों तक ठंड से राहत मिलने के आसार कम हैं। सुबह और रात के समय तापमान और गिर सकता है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह अलाव, कंबल वितरण, रैन बसेरों और मवेशियों के संरक्षण के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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