अपनी बात मनवाने जान जोखिम में डाल कर मोबाइल टावर पर चढ़ा प्रेमी, पति से नाराज पत्नी भी चढ़ी


शहर में बीते दो दिनों के भीतर सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रम चर्चा का विषय बने हुए हैं। दोनों घटनाएं भले ही अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़ी हों, लेकिन सवाल एक ही खड़ा करती हैं। आखिर लोग अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने वाले ऐसे कदम क्यों उठाते हैं?

प्रेम प्रसंग में मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक

पहला मामला 23 जनवरी का है, देवसर जिआवान थाना अंर्तगत रवि कुशवाहा निवासी धनहा गांव में बने मोबाइल टावर पर चढ़ गया। प्रेम प्रसंग और अंतरजातीय विवाह को लेकर युवक ने परिजनों को मनाने के लिए फिल्म शोले की तर्ज पर खतरनाक कदम उठा लिया। हालांकि समय रहते पुलिस और परिजनों के समझाने पर स्थिति नियंत्रण में आई और बड़ा हादसा टल गया।

झूला झूलने से मना किया तो नाराज हो गई पत्नी

दूसरा मामला सराय थाना अंतर्गत 24 जनवरी का है, पीपलखाड़ गांव की रहने वाली युवती अपने पति के साथ मेला घूमने गई थी। पत्नी ने पति से बोला कि मुझे झूला झूलना है पति ने मना किया तो पत्नी टावर पर चढ़ गईं। उसके बाद मेला परिसर में लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया। सरई पुलिस ने सूझबूझ और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए संवाद किया, उसकी मांग पूरी करने का भरोसा दिलाया और आखिरकार युवती को सकुशल नीचे उतारा गया।

संवाद की कमी और भावनात्मक असंतुलन खतरनाक

इन दोनों घटनाओं ने एक बात तो साफ कर दी है कि आज भी आम लोगों का भरोसा पुलिस पर कायम है, लेकिन साथ ही यह भी उजागर हुआ है कि समाज में संवाद की कमी और भावनात्मक असंतुलन किस हद तक खतरनाक रूप ले सकता है। क्या परिवारों की सख्ती युवाओं को ऐसे जोखिम भरे कदम उठाने को मजबूर कर रही है? क्या बच्चों की मानसिक स्थिति को लेकर हम अब भी लापरवाह हैं? और क्या इस तरह के “स्टैंड” अब अपनी बात मनवाने का तरीका बनते जा रहे हैं

संवाददाता :- आशीष सोनी