शासकीय जमीन पर अवैध निर्माण का बड़ा खुलासा, सहुआर केंद्र की भूमि हड़पने का आरोप
मामला उस समय उजागर हुआ जब ग्राम पंचायत की नाली को तोड़कर छात्रावास की बाउंड्री वॉल खड़ी की जाने लगी। ग्राम पंचायत सरपंच ने आरोप लगाया कि यह निर्माण बिना किसी पूर्व अनुमति और बिना पंचायत को सूचना दिए कराया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि रात के अंधेरे में लेआउट और बाउंड्री वॉल के लिए गड्ढे खोदे गए, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।
निर्माण स्थल पर न तो किसी विभाग का नाम अंकित है और न ही लागत व स्वीकृति से संबंधित सूचना बोर्ड लगाया गया है, जो सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। सरपंच के इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह जमीन वास्तव में शिक्षा विभाग की है, तो बिना वैधानिक प्रक्रिया के निर्माण कैसे शुरू हुआ? वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि जिम्मेदारी किसकी है—ठेकेदार की या संबंधित अधिकारियों की...?
फिलहाल, मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। अब सबकी नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला सरकारी जमीन पर कब्जे और नियमों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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