जेल की हवा खा चुका है पूर्व बीईओ, फिर भी सिस्टम के भीतर सुरक्षित
भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया गया तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी रामदास साकेत आज भी सिस्टम की छाया में सुरक्षित है, न निलंबन, न बर्खास्तगी, सिर्फ फाइलें और चुप्पी।
जिला शिक्षा अधिकारी से भोपाल तक भेजा गया प्रस्ताव तिजोरी में बंद कर दिया गया, मानो न्याय को ही कैद कर लिया गया हो। वेतन नहीं मिल रहा, लेकिन हाजिरी लग रही है, यह कैसा शासन है। सवाल सीधा है, क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है और भ्रष्ट अफसरों के लिए ढाल अगर दोष सिद्ध होने के बाद भी कार्रवाई नहीं, तो फिर जीरो टॉलरेंस सिर्फ जुमला है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली राज्य सरकार की नीयत और नीति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, मुख्यालय बैढ़न द्वारा 4 दिसंबर 2024 को तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बैढ़न एवं प्राचार्य हाई स्कूल के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य रामदास साकेत को भादवि संहिता की धारा 420 एवं 409 के तहत दोषी करार देते हुए 30 हजार रूपये अर्थदंड एवं 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बावजूद हैरानी की बात यह है कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दोषी अधिकारी पर न तो निलंबन हुआ और न ही बर्खास्तगी की कार्रवाई। वहीं स्थिति यह है कि सजा के बाद से रामदास साकेत को वेतन तो नहीं दिया जा रहा है, लेकिन वह कभी-कभार कार्यालय पहुंचकर उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर देता है।
25 दिनों तक पचौर जेल का हवा खा चुका है रामदास
सजा सुनाए जाने के बाद रामदास साकेत करीब 25 दिनों तक जेल में बंद रहा। दिसंबर 2024 के अंतिम सप्ताह में उसे अग्रिम जमानत मिल गई, लेकिन जमानत मिलते ही सिस्टम ने मानो राहत की सांस ले ली। आमतौर पर ऐसे मामलों में दोष सिद्ध होते ही विभागीय निलंबन स्वत: हो जाता है, लेकिन यहां नियम-कानून को दरकिनार कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिला शिक्षा कार्यालय सिंगरौली द्वारा रामदास साकेत के विरुद्ध निलंबन एवं अन्य विभागीय कार्रवाई के लिए विधिवत प्रस्ताव बनाकर आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल भेजा गया था। इसके बावजूद आज तक न कोई आदेश जारी हुआ और न ही कोई स्पष्टीकरण सामने आया। आरोप है कि यह फाइल भोपाल के शिक्षा कार्यालय में तिजोरी के भीतर बंद कर दी गई है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में यह फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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