दर्जनभर गांवों में ग्रामीण सड़कों पर लग रहा साप्ताहिक बाजार, यातायात प्रभावित प्रशासन मौन
हाट बाजार के दौरान ठेले, सब्जी-फल की दुकानें और अस्थायी दुकानें सड़क पर ही लगा दी जाती हैं। इससे न केवल यातायात पूरी तरह बाधित होता है, बल्कि एंबुलेंस, दमकल और अन्य आपात सेवाओं का रास्ता भी बंद हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बाइक और चारपहिया वाहन बाजार में फंसे नजर आते हैं, जिससे झगड़े और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
कार्रवाई से कतरा रहा प्रशासन
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अमला सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है। कभी-कभार औपचारिक निरीक्षण कर चेतावनी दी जाती है, लेकिन अगले ही सप्ताह वही स्थिति दोहराई जाती है, न स्थायी बाजार स्थल तय किया गया और न ही यातायात व्यवस्था के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई। सबसे चिंताजनक स्थिति स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों की है। बाजार के दिन सड़क पार करना जोखिम भरा हो जाता है। भारी वाहनों की आवाजाही और भीड़भाड़ के बीच किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। बावजूद इसके, न पुलिस सक्रिय दिखती है और न ही पंचायत स्तर पर कोई ठोस पहल की जा रही है।
प्रशासनिक अमला नही रख रहा निगरानी
सूत्रों के अनुसार कई जगहों पर पहले से ही सुरक्षित बाजार स्थल चिन्हित किए गए थे, लेकिन सुविधाओं के अभाव और निगरानी न होने के कारण दुकानदार फिर से सड़क पर आ गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि समस्या संसाधनों की नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति की है।प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागा जाएगा, क्या तब तक केवल बयानबाजी होती रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी साप्ताहिक बाजारों को तुरंत सड़क से हटाकर निर्धारित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए, यातायात पुलिस की तैनाती हो और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे प्रशासनिक अमले पर होगी। जिले की सड़कों पर चल रही यह अव्यवस्था अब चेतावनी नहीं, बल्कि खुलेआम खतरा बन चुकी हैं।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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