रीवा में ‘खाकी’ पर फिर सवाल: नशे के कारोबार में 1.26 करोड़ की कथित डील का मामला आया सामने
रीवा जिले में नशीली कफ सिरप (कोरेक्स) सहित अन्य मादक पदार्थों के अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर पुलिस विभाग कटघरे में नजर आ रहा है। इस बार मामला कथित तौर पर 1 करोड़ 26 लाख रुपये की बड़ी डील से जुड़ा हुआ है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस डील में किसी बड़े अधिकारी नहीं, बल्कि शहर के एक चर्चित थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक का नाम सामने आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नशे के विभिन्न कारोबारों को ढील देने के एवज में यह बड़ी रकम तय की गई थी। हालांकि, रीवा में इस तरह के आरोप कोई नए नहीं हैं। इससे पहले भी नशीली कफ सिरप और गांजा तस्करी को लेकर पुलिसकर्मियों और माफियाओं के बीच कथित लेन-देन के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में जांच लंबित रहकर ठंडे बस्ते में चली गई।
बताया जा रहा है कि इस बार सामने आई 1.26 करोड़ रुपये की डील अब तक की सबसे बड़ी मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले की जानकारी आईजी से लेकर एसपी तक पहुंच चुकी है और इसे गंभीरता से जांच में लिया गया है।
गौरतलब है कि मनगवां क्षेत्र में गांजा तस्कर भोला जायसवाल उर्फ दीपू के पास से जब्त मोबाइल, डायरी और व्हाट्सएप चैट में भी कथित रूप से पुलिसकर्मियों के साथ लेन-देन और इंटरनेट कॉलिंग के साक्ष्य मिले थे। उस समय तत्कालीन महिला टीआई वर्षा सोनकर ने करीब 200 पेज की डायरी गोपनीय रूप से वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी थी, लेकिन लगभग 10 महीने बीत जाने के बाद भी मामला जांच तक ही सीमित रह गया।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन पुलिसकर्मियों के नाम उस समय सामने आए थे, वे आज भी जिले के महत्वपूर्ण थानों रायपुर कर्चुलियान, सिरमौर, चोरहटा और गोविंदगढ़ में पदस्थ बताए जा रहे हैं। आरोप है कि ये कर्मचारी अब भी नशा तस्करों से सांठगांठ कर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इधर, रीवा आईजी गौरव राजपूत द्वारा पहले चिन्हित पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए थे। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 1.26 करोड़ की इस कथित डील के सामने आने के बाद पुलिस विभाग क्या ठोस कदम उठाता है। फिलहाल, पूरे मामले की आधिकारिक पुष्टि और जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

0 Comments