आखिर सिंगरौली जिले के गावों में क्यों बढ़ रहे अपराध
ग्रामीण इलाकों में अपराध बढ़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. विस्थापन और मुआवजे का विवाद
सिंगरौली "भारत की ऊर्जा राजधानी" है, जहाँ लगातार कोयला खदानों और पावर प्लांट के लिए जमीन का अधिग्रहण होता है।
पारिवारिक कलह: मुआवजे की मोटी रकम के बंटवारे को लेकर सगे भाई-बहनों और रिश्तेदारों के बीच खूनी संघर्ष आम हो गया है।
मुआवजा माफिया: फर्जी तरीके से सरकारी पैसा हड़पने के चक्कर में अवैध निर्माण और कागजी धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं।
2. नशे का बढ़ता जाल
हालिया रिपोर्ट्स (2025-26) के अनुसार, माड़ा, छतौली और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध नशे (कोरेक्स, गांजा, हीरोइन) का कारोबार तेजी से फैला है।
युवा वर्ग नशे की गिरफ्त में है, और नशे की लत को पूरा करने के लिए वे चोरी, लूट और मारपीट जैसे छोटे-बड़े अपराधों को अंजाम दे रहे हैं।
3. रेत और कबाड़ माफिया
सोन नदी और आसपास के क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन एक बड़ा मुद्दा है।
रेत और कबाड़ के वर्चस्व को लेकर अपराधियों के गुटों के बीच अक्सर हिंसक झड़पें होती हैं। कई बार ये माफिया पुलिस और प्रशासन को भी चुनौती देने से नहीं चूकते।
4. सामाजिक और पारिवारिक विघटन
अवैध संबंध और हत्याएं: हाल ही में सिंगरौली में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ प्रेम प्रसंग या पारिवारिक विवाद के चलते हत्या जैसे जघन्य अपराध किए गए (जैसे रजनिया कटरा जंगल कांड)। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और बदलती जीवनशैली भी ग्रामीण परिवेश में तनाव का कारण बन रही है।
बेरोजगारी: विस्थापन के बाद कई आदिवासियों और ग्रामीणों के पास आजीविका का स्थायी साधन नहीं बचा, जिससे हताशा में कुछ लोग अपराध की राह चुन लेते हैं।
5. भौगोलिक स्थिति और पुलिस की चुनौतियां
सिंगरौली का ग्रामीण इलाका काफी फैला हुआ और दुर्गम है।
सीमावर्ती जिला: उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे होने के कारण अपराधी वारदात को अंजाम देकर आसानी से दूसरे राज्यों में भाग जाते हैं।
दूरस्थ गांवों में पुलिस की गश्त कम होना भी अपराधियों के हौसले बढ़ाता है।
सिंगरौली के गांवों में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई काफी नहीं है। इसके लिए मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता, नशे के सौदागरों पर सख्त नकेल और विस्थापित युवाओं के लिए ठोस रोजगार नीतियों की सख्त जरूरत है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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