विक्रेताओं ने कलेक्टर से लगाई गुहार, वेतन कटौती और बकाया भुगतान को लेकर उठाई आवाज
आवेदन में बताया गया कि विक्रेताओं को समय पर वेतन नहीं दिया जाता। कई बार सात से आठ माह या एक वर्ष बाद वेतन भुगतान किया जाता है। अप्रैल 2025 से 10 हजार 500 रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित होने के बावजूद बिना किसी आदेश के कहीं 7500, कहीं 8100 और कहीं 8400 रुपये ही दिए जा रहे हैं। विक्रेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अप्रैल 2022 से लागू वेतन वृद्धि का लाभ कई समितियों में अलग-अलग तिथियों से दिया गया है। कुछ जगह अप्रैल 2023 और कहीं अप्रैल 2024 से लागू किया गया, जिससे कई विक्रेता लाभ से वंचित रह गए। उन्होंने प्रति माह 2100 रुपये के अंतर की एरियर राशि दिलाने की मांग की है। विक्रेताओं ने सीधी और सिंगरौली जिलों के बीच बारदानों की राशि को लेकर भी भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सीधी जिले में जूट के बोरे के लिए 12 रुपये और प्लास्टिक के लिए 7 रुपये लिए जा रहे हैं, जबकि सिंगरौली में 15 से 25 रुपये तक वसूली की जा रही है।विक्रेताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि उनकी सभी समस्याओं का शीघ्र निराकरण कर हर माह एक तय तिथि पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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