समाज की रूढ़िवादी सोच ने छीनी मासूम बेटियों की जिंदगी


मध्यप्रदेश से दो दिल दहला देने वाली घटनाओं की खबरें सामने आई हैं, जो समाज में बेटियों के प्रति बनी रूढ़िवादी सोच की भयानक हकीकत को उजागर करती हैं।

सागर जिले की घटना

सागर जिले के खमरिया गांव में 30 वर्षीय सविता लोधी ने अपनी चार मासूम बेटियों को खेत के कुएं में फेंक दिया और इसके बाद खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सबसे छोटी बच्ची महज 5 महीने की थी। पुलिस के अनुसार महिला पिछले समय से मानसिक तनाव में थी। पति चंद्रभान लोधी मजदूरी के लिए जबलपुर में रहता था और करीब एक साल से घर नहीं आया था। पुलिस ने मौके से महिला का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

खरगोन जिले की घटना

खरगोन जिले के सनावद थाना क्षेत्र में नानी बाई ने अपने तीन बच्चों को कुएं में धक्का दे दिया। तीनों बच्चों की डूबने से मौत हो गई, जबकि महिला जिंदा बच गई। मृतकों में 4 साल का अर्जुन, 2 साल का करण और 20 दिन का नवजात शामिल थे। पुलिस ने बच्चों के शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था और मजदूरी करके ही गुजारा करता था।

इन दोनों घटनाओं ने सवाल खड़े कर दिए हैं—कब तक बेटियों की जिंदगी समाज की रूढ़िवादी सोच और दबाव की भेंट चढ़ती रहेगी? ये घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि मानसिक तनाव और सामाजिक भेदभाव कितने घातक साबित हो सकते हैं।

संवाददाता :- स्वाति रजक