LPG को लेकर नई चर्चा: क्या 14.2 किलो की जगह 7 या 10 किलो गैस वाले सिलेंडर मिलेंगे?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वहाँ चल रहे युद्ध के बीच भारत में LPG सप्लाई को लेकर भी हल्की-हल्की चिंता दिखाई देने लगी है। हाल ही में इकनॉमिक टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अगर गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ता है तो घरेलू सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम करके दी जा सकती है। यानी अभी जो 14.2 किलो का सिलेंडर मिलता है, उसकी जगह 10 किलो या शायद 7 किलो गैस भरकर सिलेंडर देने का विकल्प भी देखा जा रहा है।

दरअसल भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में LPG विदेशों से मंगाता है और इसका बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट के देशों से आता है। अगर उस इलाके में युद्ध या समुद्री रास्तों में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो गैस के जहाज़ों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए तेल कंपनियाँ एक तरह का बैकअप प्लान सोच रही हैं, ताकि अगर सप्लाई कम हो जाए तो भी ज्यादा से ज्यादा घरों तक गैस पहुँचाई जा सके।

इस चर्चा के मुताबिक एक तरीका यह हो सकता है कि फिलहाल इस्तेमाल हो रहे 14.2 किलो सिलेंडर में ही कम गैस भरी जाए। मान लीजिए अगर हर सिलेंडर में 10 किलो गैस दी जाए, तो उसी स्टॉक से ज्यादा परिवारों को गैस मिल सकती है। हालांकि यह सिर्फ एक इमरजेंसी विकल्प बताया जा रहा है।

इधर गैस एजेंसी चलाने वाले डीलरों को यह आइडिया ज्यादा पसंद नहीं आ रहा। उनका कहना है कि अगर सिलेंडर में गैस कम कर दी गई तो उपभोक्ताओं को जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक करना पड़ेगा। इससे वितरण व्यवस्था और उलझ सकती है और एजेंसियों पर दबाव भी बढ़ेगा।

उधर आम उपभोक्ताओं की भी अपनी चिंता है। कई लोगों का कहना है कि अभी एक सिलेंडर करीब दो हफ्ते या उससे थोड़ा ज्यादा चल जाता है। लेकिन अगर गैस की मात्रा कम कर दी गई तो वही सिलेंडर शायद एक हफ्ते-दस दिन में खत्म हो जाएगा। ऐसे में रसोई चलाना मुश्किल हो सकता है।

हालाँकि इस पूरे मामले में सरकार की तरफ से अभी साफ किया गया है कि 7 या 10 किलो सिलेंडर देने का कोई फैसला नहीं हुआ है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि ऐसी खबरें फिलहाल सिर्फ अटकलों पर आधारित हैं।

कुल मिलाकर अभी स्थिति यही है कि लोगों को वही 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर मिलता रहेगा। लेकिन दुनिया में बदलती परिस्थितियों को देखते हुए सरकार और तेल कंपनियाँ भविष्य के लिए अलग-अलग विकल्पों पर जरूर नजर रखे हुए हैं, ताकि अगर कभी सप्लाई पर संकट आए तो हालात संभाले जा सकें। 

संवाददाता : कृष्ण कांत