42°C की तपिश में “बिजली संकट” गहराया: मेंटेनेंस फेल, शहर से गांव तक घंटों कटौती से हाहाकार



भीषण गर्मी के बीच तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने लगी है। बढ़ते तापमान के साथ बिजली उपकरणों पर लोड अचानक बढ़ गया है, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। शहर हो या ग्रामीण इलाका—हर जगह अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है।

हाल ही में बिजली कंपनी द्वारा बड़े स्तर पर मेंटेनेंस कार्य किए गए थे, ताकि गर्मी में फाल्ट जैसी समस्याओं से बचा जा सके। लेकिन जैसे ही तापमान ने तेवर दिखाए, व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आ रही है। कई इलाकों में बार-बार बिजली गुल हो रही है, वहीं ओवरलोड के कारण केबल जलने और तकनीकी फाल्ट की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

जानकारी के अनुसार वीर सावरकर वार्ड स्थित सबस्टेशन के सभी फीडरों पर दबाव बढ़ गया है। खासकर इटावा फीडर पर लोड सामान्य 110 एम्पीयर से बढ़कर 160 एम्पीयर तक पहुंच गया है। जेई आकाशदीप ने बताया कि तापमान बढ़ने के साथ ट्रांसफॉर्मरों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है, जिसे संतुलित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 मेंटेनेंस के नाम पर कटौती, व्यवस्था पर उठे सवाल

बांदरी नगर और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर कई बार बिजली कटौती की जा रही है। शादी सीजन और तेज गर्मी के कारण बिजली की मांग और खपत दोनों में इजाफा हुआ है। बावजूद इसके, मेंटेनेंस के नाम पर बार-बार सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

 4 से 8 घंटे तक गुल रहती है बिजली, जनजीवन अस्त-व्यस्त

किशनपुरा क्षेत्र में रोजाना 4 से 5 घंटे तक बिजली गायब रहती है। बिना किसी पूर्व सूचना के हो रही कटौती से लोग खासे परेशान हैं। कूलर और पंखे बंद होने से बच्चों और बुजुर्गों की हालत खराब हो रही है, वहीं व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

उधर, बरोदिया कलां और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हालात और भी गंभीर हैं। यहां 5 से 8 घंटे तक बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या आम हो गई है। रात के समय बिजली गुल होने पर लोग घरों की छतों या बाहर सोने को मजबूर हैं।

संवाददाता:- स्वाति रजक