दतिया में सियासी भूचाल: राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द, क्या फिर आमने-सामने होंगे नरोत्तम और भारती?


दतिया/भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने सहकारिता बैंक भ्रष्टाचार मामले में कोर्ट से सजा मिलने और उनकी विधायकी रद्द होने के बाद अब दतिया में उपचुनाव की आहट तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

दतिया से कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती को दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में दोषी करार दिया है।

  • सजा: विभिन्न धाराओं में अधिकतम 3 साल की जेल।
  • परिणाम: सजा के ऐलान के साथ ही विधानसभा सचिवालय ने नियमों के तहत उनकी सदस्यता शून्य (निरस्त) घोषित कर दी है।

कांग्रेस ने इस पूरी अदालती कार्रवाई और सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया को सरकार की 'राजनीतिक साजिश' करार दिया है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार पर कानून का प्रहार बता रही है।

नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और 'मिशन दतिया'

राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। मंगलवार को राजधानी भोपाल में हुई एक उच्चस्तरीय मुलाकात ने राजनैतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया:

  • महत्वपूर्ण मुलाकात: पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निवास पर बंद कमरे में करीब आधा घंटा चर्चा की।
  • संकेत: सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में दतिया उपचुनाव की तैयारियों और भावी समीकरणों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ है।

"दतिया नरोत्तम मिश्रा का अभेद्य गढ़ माना जाता रहा है। 2023 के चुनाव में मिली हार के बावजूद वे लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो उनके आगामी चुनाव लड़ने के पुख्ता संकेत हैं।"

2023 के चुनावी आंकड़े: एक नजर में

पिछले विधानसभा चुनाव में दतिया सीट पर बेहद कड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था, जिसमें राजेंद्र भारती ने प्रदेश के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा को पटखनी दी थी।

क्या फिर सजेगा चुनावी मैदान?

राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने से दतिया सीट अब रिक्त हो गई है। ऐसे में चुनाव आयोग द्वारा जल्द ही यहां उपचुनाव की घोषणा की जा सकती है।

भाजपा की ओर से: नरोत्तम मिश्रा स्वाभाविक दावेदार हैं। उनकी संगठन में पकड़ और क्षेत्र में मौजूदगी उन्हें सबसे मजबूत विकल्प बनाती है।

कांग्रेस की ओर से: पार्टी इस समय कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सहानुभूति फैक्टर को भुनाने की कोशिश में है। भारती की सदस्यता जाने को पार्टी 'लोकतंत्र की हत्या' बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी में है।

दतिया की जनता एक बार फिर दो दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को तैयार है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की कार्यवाही और सदस्यता के इस फेरबदल के बीच दतिया का 'ताज' किसके सिर सजता है।

संवाददाता - अंशुल सोनी