मंत्री धर्मेन्द्र सिंह की विधानसभा में सचिव फर्जी बिलों से निकाल रहे राशि, वहीं जबेरा खरीदी केंद्र में कमीशनखोरी का लग रहा आरोप 

दमोह जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत जबेरा में एक साल से विकास काम ठप पड़े हैं। पंचायत राशि की बंदरबाट के आरोप लग रहे हैं। कई गलियों में आजादी के बाद से अब तक सीसी रोड नहीं बनी। कई सीसी सड़कों के नाम पर राशि आहरित हो गई।

सड़कें नहीं बन पाईं। इसकी शिकायतें जिले से लेकर प्रदेश तक की गईं। अब तक कार्रवाई नहीं हुई। गांव के विकास के नाम पर करोड़ों रुपए आहरित किए गए। इसकी शिकायत जिला पंचायत में की गई। इसके आधार पर सचिव क्लू यादव निलंबित हुआ। जिन निर्माण कार्यों के अधूरे होने की शिकायत की गईउन पर एक साल होने को है। सुधार काम नहीं हुआ।

सीसी सड़कें जर्जर हो गईं। जगह-जगह सड़कें टूटी हैंगड्ढे हो टंगी है। मरम्मत के अभाव में गए हैं। बिजली के खंभों पर लाइट जलती नहीं। सरपंच शिवलाल धुर्वे का कहना है कि सचिव और कुछ सदस्य मिलीभगत कर राशि निकालकर खुर्द-बुर्द कर लेते हैं। उन्हें पता नहीं चल पाता। फर्जी ब्रिल लगा दिए जाते हैं। प्रभारी सचिव जनमेजय दुबे का कहना है कि सरपंच बिलों पर हस्ताक्षर नहीं करते। इसी कारण काम नहीं हो पा रहे। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कुछ पुराने लोग कब्जा जमाए बैठे हैं। को बहला-फुसलाकर पहले वे अपने निजी स्वार्थ में कुछ पंचों शिकायत करवाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यह खेल 20 वर्षों से चल रहा है।

जबेरा के खरीदी केंद्र में किसानों से लूट के आरोप लगे हैं। समर्थन मूल्य पर उपज बेचने आए किसानों से तुलाई के पैसे वसूले जा रहे हैं। समिति को शासन से तुलाई राशि मिलने के बाद भी वसूली जारी है। कम्प्यूटर ऑपरेटर पर बिना कमीशन फीडिंग न करने का आरोप है। सैकड़ों शिकायतों के बाद भी उसे नहीं हटाया गया। ऑपरेटर पर पूरी खरीदी में दखल का आरोप है। वह तोल पर्ची पर खुद हस्ताक्षर करता है। किसानों ने उसकी मासिक आय 12 हजार बताई। किसानों ने ऑपरेटर को हटाने की मांग की है।