रीवा विश्वविद्यालय में बड़ा घोटाला: प्रैक्टिकल परीक्षा में शिक्षकों पर वसूली और हंगामे का आरोप

शिक्षा महाविद्यालयों में प्रैक्टिकल परीक्षा में जिन शिक्षकों की अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय ने ड्यूटी लगाई थी। उन्हीं में से तीन शिक्षकों ने सीधी के एक कॉलेज में कांड कर दिया। इनके कांड की गूंज अब चारों तरफ फैल रही है। राजभवन में भी शिकायत की गई है। साथ ही कुलसचिव को कॉलेज प्राचार्य ने पत्र लिखकर सारी कारस्तानी से अवगत कराते हुए दोबारा ऐसे शिक्षकों को परीक्षा लेने के लिए न भेजने की मांग की है। इसमें एक शिक्षक कुलपति के साथ साथ रहने वाले शोध सहायक की पत्नी भी हैं। इन्हें हर साल उपकृत किया जाता है। अधिक से अधिक कॉलेज आवंटित किए जाते हैं। इस आवंटन की पोल भी खुल गई।

आपको बता दें कि अवधेश प्रताप विश्वविद्यालय अंतर्गत आने वाले शिक्षा महाविद्यालयों में प्रायोगिक परीक्षा आयोजित की जाती है। इन कॉलेजों में प्रायोगिक परीक्षा लेने के लिए विवि से ही वाह्य परीक्षक नियुक्त किए जाते हैं। इस बार भी वाह्य परीक्षक नियुक्त किए गए। बीएड और एमएड के लिए अलग अलग शिक्षकों को योग्यता के हिसाब से नियुक्त किया गया। हालांकि विवि से नियुक्त किए गए शिक्षकों की योग्यता को दरकिनार कर चहेते शिक्षकों को भी विद्यालय प्रैक्टिल के लिए आवंटित किए गए। तीन शिक्षकों को सीधी शिक्षा महाविद्यालय पनवार के लिए नियुक्त किया गया। इन परीक्षकों को 18 मार्च 2025 को बीएड प्रथम वर्ष, बीएड द्वितीय वर्ष की परीक्षा लेनी थी। तीनों शिक्षकों ने परीक्षा तो ली लेकिन अंक भरने के बाद प्रोफार्मा देने के बदले रुपयों की डिमांड कर बैठे। उन्होंने प्रोफार्मा देने के बदले 15-15 हजार रुपयों की डिमांड कर दी। जबकि कॉलेज प्राचार्य सभी शिक्षकों को 7-7 हजार रुपए का ऑफर पहले ही कर चुके थे। रुपए उनकी पसंद के हिसाब से नहीं मिला तो प्रोफार्मा ही फाड़ दिया गया। एक महिला शिक्षक तो अपने पर्स में ही रख कर चली गईं। शिक्षकों की इस मनमानी के खिलाफ प्राचार्य ने कुलसचिव अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से पत्राचार किया है। सभी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही उन्हें दोबारा परीक्षा लेने के लिए न भेजने की मांग की है। 

किस किस शिक्षक की लगी थी सीधी में ड्यूटी

शिक्षा महाविद्यालय सीधी पनवार में तीन शिक्षकों की ड्यूटी विश्वविद्यालय से लगाई गई थी। इसमें अरदेंदु रंजन मिश्रा, डॉ अरुण पाण्डेय और डॉ शोभा रानी दुबे शामिल हैं। इन तीनों ने ही सीधी में जाकर कांड कर दिया। प्राचार्य ने कुलसचिव को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से अरदेन्दु रंजन मिश्रा की करतूत बयां की है। उन्होंने लिख है कि अरदेंदु ने भरे हुए पर्ण, प्रतिपर्ण को सभी स्टाफ के सामने फाड़ दिया गया। अभद्र शब्दों का इस्तेमाल भी किया गया। 

इसी वसूली के लिए लगाई जाती है पत्नी की ड्यूटी

सीधी में हुए वसूली की डिमांड कांड के बाद अब विश्वविद्यालय में इस सिंडीकेट का भी खुलासा हो गया। यह सब कांड कुलपति डॉ राजेन्द्र कुड़रिया के आने के बाद ज्यादा हो रहा है। पीएचडी की परीक्षा में भी आरोप लगा था। अब बीएड परीक्षा में वाह्य परीक्षकों की नियुक्ति में अवैध वसूली का भी सामला सामने आ गया है। इन सारे कांड के बाहर आने के बाद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि सभी मिलकर ही यह वसूली का अभियान या सिंडीकेट चला रहे हैं। इसमें कुलपति के साथ हर समय रहने वाले शोध सहायक निलिन दुबे की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध मानी जाती है। इन्होंने तो अपनी पत्नी को करीब 25 कॉलेज आवंटित कराए हैं। इनकी पत्नी भी सीधी कांड में शामिल हैं। 

कुलसचिव तक पहुंचा ही नहीं पत्र, दबा दिया गया

हद तो यह है कि प्राचार्य के पत्राचार के बाद खलबली मच गई। मैनेजमेंट का खेल शुरू हुआ। पत्र विवि पहुंच गया। 31 मार्च को ही पत्र पहुंच गया। पत्र को बाबूलाल साकेत ने मार्क भी किया है। इसके बाद इसकी भनक जैसे ही कुलपति के खास तक पहुंची। सीधी के प्राचार्य पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया गया। अब शिक्षा महाविद्यालय पनवार सीधी के प्राचार्य मृगेन्द्र सिंह ने भी पत्र लिखने के बाद नानुकूर करना शुरू कर दिए हैं। वहीं कुलसचिव नीरजा नामदेव का कहना है कि उनके पास तक पत्र पहुंचा ही नहीं है। 

संवाददाता :–आशीष सोनी