चूहों से भरी कालकोठरी, मिर्च वाला खाना के लिए पूर्व पीएम की पत्नी ने दे डाली पाकिस्तान को नसीहत
संयुक्त राष्ट्र की इस एक्सपर्ट ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की अपील करते हुए कहा कि हिरासत की परिस्थितियां किसी भी सूरत में दुर्व्यवहार के दायरे में नहीं आनी चाहिए और न ही वे मौलिक मानवाधिकारों का उल्लंघन कर सकती हैं.
संयुक्त राष्ट्र एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की बेगम बुशरा बीबी खान को जिन हालात में हिरासत में रखा गया है, वे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं. विशेषज्ञ ने पाकिस्तानी अधिकारियों से इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुशरा बीबी को एक बेहद छोटी और बिना रोशनदान वाली कोठरी में रखा गया है, जो बेहद गंदी है और कीड़ों एवं चूहो से भरी बताई जा रही है. ये कालकोठरी सामान्य तापमान की तुलना में अधिक गर्म है. बिजली कटौती की वजह से यह कोठरी अक्सर अंधेरे में डूब जाती है. बुशरा को पीने के लिए गंदा पानी और खाने में जरूरत से ज्यादा मिर्च दी जा रही है, जिस वजह से यह खाना खाने लायक नहीं है. इस वजह से बुशरा का तकरीबन 15 किलोग्राम कम हो गया है. इसके अलावा उन्हें बार-बार संक्रमण हो रहा है और वह अमूमन बेहोश हो जाती हैं. कहा जा रहा हैकि उन्हें अल्सर भी हो गया है.
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि बुशरा बीबी खान को अक्सर दिन में 22 घंटे से अधिक समय तक लगभग पूर्ण एकांत में रखा जाता है। कई बार यह अवधि दस दिनों से भी ज्यादा हो जाती है। इस दौरान उन्हें न तो व्यायाम की अनुमति मिलती है, न पढ़ने की सामग्री, न वकीलों से मुलाकात, न परिवार से मिलने का मौका और न ही अपने निजी डॉक्टरों तक पहुंच.
संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि हिरासत की स्थितियों और स्थानों का निर्धारण करते समय बंदियों की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए. ऐसी परिस्थितियां अंतरराष्ट्रीय न्यूनतम मानकों से कमतर हैं. किसी भी बंदी को अत्यधिक गर्मी, दूषित भोजन या पानी, या ऐसे हालात में नहीं रखा जाना चाहिए जो पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को और गंभीर बना दें.
एडवर्ड्स ने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बुशरा बेगम को अपने वकीलों से संपर्क करने, परिवार से मिलने और हिरासत के दौरान सार्थक मानवीय संपर्क का अवसर मिले. उन्होंने कहा कि इस तरह का लंबा एकांत मानसिक पीड़ा को बढ़ाता है और जरूरी सुरक्षा उपायों तक पहुंच में बाधा डालता है. जब इसे इलाज न की गई चिकित्सकीय जरूरतों के साथ जोड़ा जाता है, तो यह गंभीर और तात्कालिक जोखिम बन जाता है. बता दें कि संयुक्त राष्ट्र का यह बयान पाकिस्तान में राजनीतिक बंदियों के साथ व्यवहार को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय जांच और दबाव को और मजबूत करता है.
संवाददाता :- आशीष सोनी

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