कलेक्टर साहब मैं जिंदा हूं सरकारी कागजों में मृत, खुद को जिंदा साबित करने दफ्तरों के चक्कर काट रहा 


कलेक्टर साहब मैं जिंदा हूं, अधिकारियों ने दस्तावेज में मृत साबित कर दिया है… यह कहना है मध्य प्रदेश के कटनी जिले के एक किसान का। किसान ने न्यााय के लिए सीएम हेल्पलाइन में गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परेशान होकर अब वह कलेक्टर की शरण में पहुंचा और अपनी पीड़ा बताई।

कटनी जिले के रीठी तहसील अंतर्गत ग्राम गुरजीकला के किसान रामभरण विश्वकर्मा ने बताया कि 250 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन कराया था, लेकिन सिस्टम की एक बड़ी गलती ने उन्हें ज़िंदा होते हुए भी सरकारी कागज़ों में मृत बना दिया। किसान के मोबाइल पर जब पंजीयन से जुड़ा मैसेज आया तो उसमें उसे मृत श्रेणी में दर्शाया गया। समग्र आईडी में भी किसान को मृत बताया गया। जिसके चलते उसका धान खरीदी पंजीयन रद्द हो गया।

पीड़ित किसान ने न्याय पाने के लिए सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज करवाई है। किसान रामभरण विश्वकर्मा ने बताया कि खाद विभाग की इस गंभीर लापरवाही ने एक जिंदा किसान को कागजों में मृत बना दिया। जिसका सीधा असर उसकी आजीविका पर पड़ा है। सरकारी सिस्टम की एक गलती किसान को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान कर रही है।

अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर वह परेशान हो गया है, लेकिन न्याय नहीं मिल पा रहा है। दस दिन तक परेशान होने के बाद किसान कटनी कलेक्टर कार्यालय पहुंचा। जहां उसने अपनी पीड़ा कलेक्टर आशीष तिवारी के सामने रखी। वहीं कलेक्टर ने एसडीएम को मामले को देखने के लिए कहा हैं।

संवाददाता :- आशीष सोनी