कलेक्टर के आदेश को एसडीएम ने रौंदा, अनिश्चितकालीन धरना शुरू
विमुक्त घुमन्तू एवं अर्धघुमन्तू जनजाति महासंघ के ब्लॉक अध्यक्ष सरजू पाल ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शासन द्वारा 04 अक्टूबर 2018 को गडरिया समुदाय को विधिवत विमुक्त एवं अर्धघुमन्तू जनजाति की श्रेणी में शामिल किया गया था। इसके बाद कलेक्टर सिंगरौली ने सभी तथ्यों की जांच कर प्रमाण पत्र जारी करने के स्पष्ट आदेश पारित किए, लेकिन चितरंगी के उपखण्ड अधिकारी (SDM) ने इन आदेशों को खुलेआम रौंदते हुए आवेदनों को खारिज कर दिया।
तकनीकी बहानों में अधिकारों की हत्या
कंप्यूटर खसरा, बंटन, पट्टा प्रविष्टि जैसे बहाने बनाकर प्रमाण पत्र रोकना यह दर्शाता है कि या तो अधिकारियों को शासन के आदेशों का ज्ञान नहीं है, या फिर जानबूझकर विमुक्त समाज को उसके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। यह महज़ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित सामाजिक भेदभाव का मामला बनता जा रहा है।
कलेक्टर बनाम एसडीएम— किसका आदेश मान्य?
सबसे बड़ा और सीधा सवाल यह है कि—
जब कलेक्टर का आदेश स्पष्ट और लिखित है, तो एसडीएम ने आवेदन किस अधिकार से खारिज किए?
क्या तहसील स्तर के अधिकारी अब जिला प्रशासन से ऊपर हो गए हैं?
क्या विमुक्त घुमन्तू समाज को योजनाओं, आरक्षण और संवैधानिक लाभों से दूर रखने की रणनीति अपनाई जा रही है?
धरना शुरू, प्रशासन मौन
इन तमाम सवालों और अधिकारों की अनदेखी के विरोध में 22 दिसंबर से एसडीएम कार्यालय चितरंगी के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रारम्भ कर दिया गया है। धरना स्थल पर ध्वनि विस्तारक यंत्र की अनुमति तक मांगी जा चुकी है, लेकिन प्रशासन की ओर से न संवाद है, न समाधान।
चेतावनी
महासंघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समय रहते विमुक्त घुमन्तू एवं अर्धघुमन्तू जनजाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और जिला शासन की होगी।
अब यह देखना होगा कि सिंगरौली प्रशासन कानून और शासनादेश का पालन करता है, या फिर विमुक्त समाज को आंदोलन की आग में झोंककर हालात और विस्फोटक बनाता है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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