न्यू ईयर पर सागर के बाहर क्यों जाना? यहीं पर पचमढ़ी, मिनी स्विटजरलैंड, कश्मीर जैसी लोकेशन, फोटोज चौंका देंगी..!
सागर: क्या आप सागर के रहने वाले हैं, और न्यू ईयर पर कहीं बाहर जाने के लिए डेस्टिनेशन तलाश रहे हैं, तो थोड़ा ठहर जाइए. क्योंकि सागर में ही पचमढ़ी, मिनी स्वीटजरलैंड, जम्मू पातालकोट जैसी लोकेशन है. आप शायद ही यहां गए हों. तस्वीरें चौंका देंगी आपको...
आज हम ऐसी जगह बताने जा रहे हैं जो प्रकृति प्रेमियों के लिए धरती पर स्वर्ग जैसी है. यहां जहां तक नजर डालेंगे जंगल ही जंगल दिखाई देंगे. जितना गहराई तक देखेंगे, उतना पाताल के जैसा नजारा दिखाई देगा. जहां तक आंखें घुमाएंगे, वहां पहाड़ और चट्टानें दिखाई देंगी. नदिया, तलाब, वन्य प्राणी, झील सब कुछ यहां है.
सागर में न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के लिए यहां जंगल, जानवर, चट्टानें, पहाड़, गुफाएं, झरना, नदियां, मंदिर, किले, इतिहास और संस्कृति पर्यटन सब कुछ है. यह एक जगह नहीं, जिस दिशा में जाएंगे, उस तरफ प्रकृति का आनंद उठा पाएंगे. ऊपर और टॉप में शहर के बीच में बीच स्थित खुबसुरत झील है, जहां जम्मू जैसी नजारे दिखाई देते हैं.
इसी तरह रानगिर क्षेत्र भी पर्यटन और आस्था का अद्भुत संगम है, जहां माता हरसिद्धि का प्रसिद्ध मंदिर है. यहां विंध्य पर्वत की श्रृंखलाओं की चट्टानों के बीच से निकली देहार नदी का मनोरम दृश्य देखकर हर कोई यहां अजीब सी शांति सुकून महसूस करता है. यहां आकर लोगों की थकान चिंता सब कुछ दूर हो जाती है. ऐसा लगता है कि अब बस यही रह जाए जंगलों के बीच बड़े-बड़े पहाड़ों से घिरा यह इलाका सागर के लोगों को जरूर देखना चाहिए.
सागर गढ़ाकोटा रोड पर प्रकृति को करीब से देखने वाला एक और स्थान है, जिसे आपचंद की गुफाओं के रूप में जाना जाता है. यहां दो पहाड़ों के बीच करीब 300 फीट गहरी जगह से गन्धर्वी नदी बहती है. इसी नदी के किनारे बड़ी-बड़ी गुफाएं हैं, जहां पर एक गुफा में करीब 100 साल पुराना हनुमान मंदिर है. इन्हीं गुफाओं में पुजारी का परिवार रहता है. कल-कल करते हुए बहती नदी की ध्वनि पेड़ों से टकराकर सरसती हवाएं, पक्षियों की चहचहाहट प्रकृति प्रेमियों को दीवाना बना देती है और फिर बार-बार यहां आने को आकर्षित करती है.
इसी तरह पुराना सागर कहां जाने वाला गढ़पहरा का किला भी अपने इतिहास की कहानियों को सुनाता है. 15वीं शताब्दी में खंडहर हो चुका किला और उसके बाहर बना शीश महल राजा का नर्तकी से प्रेम और रानी के धोखे की कहानी को सुनाता है.
इसके अलावा सागर में ही विश्व प्रसिद्ध 4,000 साल पुराना एरन है, जो हड़प्पा कालीन सभ्यता के समक्ष माना जाता है. यह राजा चंद्रगुप्त का स्वभाव नगर रहा है. वर्तमान में यहां पर विश्व की सबसे बड़ी वराह प्रतिमा विष्णु प्रतिमा और गरुड़ स्तंभ है, जिसे देखने के लिए इतिहासविदों के साथ-साथ विदेश से भी टूरिस्ट आते हैं.
नो फ़िकर न्यूज़ दमोह






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