लाडली बहनों के नाम पर लोन घोटाला: न सहमति, न जानकारी, फिर भी पास हो गया कर्ज
बैंक से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 में “इंद्रा स्व-सहायता समूह, खाड़ी टोला” के नाम पर 3 लाख रुपये का लोन पास किया गया है। हैरानी की बात यह है कि जिन महिलाओं के नाम पर यह समूह दर्शाया गया है, उन्हें न तो समूह गठन की जानकारी थी और न ही लोन लेने की कोई सहमति।
समूह की कथित अध्यक्ष इंद्रावती सिंह का कहना है कि उन्हें यह तक पता नहीं था कि वे किसी समूह की अध्यक्ष हैं। वहीं किसी भी सदस्य को यह जानकारी नहीं है कि समूह का सचिव कौन है। गांव में आशंका जताई जा रही है कि सरस्वती देवी जायसवाल, जो कि राजेंद्र जायसवाल की पत्नी हैं, सचिव हो सकती हैं। आरोप है कि राजेंद्र जायसवाल ने ही महिलाओं को अंधेरे में रखकर फर्जी तरीके से समूह का गठन किया और लोन पास करा लिया।
मामला उजागर होते ही राजेंद्र जायसवाल पिछले 15 दिनों से फरार है। न वह घर में है, न गांव में दिखाई दे रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
पीड़ित महिलाएं अब बैंक के चक्कर काटने को मजबूर हैं और बैंक प्रबंधन से लोन फाइल व दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग कर रही हैं, ताकि वे थाने में शिकायत दर्ज करा सकें। लेकिन आरोप है कि बैंक प्रबंधन भी सहयोग नहीं कर रहा, जबकि यह बैंक का दायित्व था कि लोन पास करते समय संबंधित महिलाओं की मौजूदगी, सहमति और सत्यापन सुनिश्चित किया जाता।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि महिलाओं ने कभी बैंक जाकर लोन के कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किए घर पर ही हस्ताक्षर करवा लिए गए,बिना सहमति और जानकारी के लोन स्वीकृत कर दिया गया यह पूरा मामला बैंक कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है।
पीड़ित महिलाएं प्रशासन से न्याय, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और लोन निरस्तीकरण की मांग कर रही हैं। यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो यह मामला कई और महिलाओं को कर्ज के जाल में फंसाने का खतरनाक उदाहरण बन सकता है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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