1 मंत्री 3 विधायक 1 सांसद 1 सीडा 1 ननि 1जिलाध्यक्ष मात्र 400 वोट नहीं दिलवा पाए,भाजपा की करारी हार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भाजपा से चूक कहां हुई, जवाब साफ है, संगठनात्मक अहंकार, आरएसएस की अनदेखी, कमजोर बूथ प्रबंधन और कार्यकर्ताओं की उदासीनता।
भाजपा संगठन ने इस उपचुनाव में आरएसएस की भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज किया। जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयंसेवकों को न तो भरोसे में लिया गया और न ही चुनावी रणनीति में शामिल किया गया। नतीजा यह हुआ कि बूथ स्तर पर भाजपा की पकड़ ढीली पड़ गई। कई मतदान केंद्रों पर भाजपा समर्थक मतदाता घर से ही नहीं निकले। टिकट वितरण भी पार्टी के लिए गले की फांस बन गया। प्रत्याशी चयन में भाजपा ने लंबी चूक की। स्थानीय समीकरणों, जनभावनाओं और वार्ड की नब्ज को समझने के बजाय ऊपर से फैसला थोप दिया गया। प्रत्याशी का व्यवहार और अहंकार भी कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया। अंदरखाने नाराजगी इतनी बढ़ी कि कई भाजपा कार्यकर्ता चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रहे। जानकारी के अनुसार सात में से छ: मतदान केंद्रों पर भाजपा को भारी मतों से पिछड़ना पड़ा। यह स्थिति तब है, जब भाजपा के पास संगठन, संसाधन और सत्ता, तीनों मौजूद थे। इसके बावजूद कमजोर बूथ मैनेजमेंट ने पार्टी की पोल खोल दी। यहां कांग्रेस पार्टी की एक तरफा जीत हुई है। भाजपा प्रत्याशी 244 मत पर सिमट गये। 173 मतों से हार का सामना करना पड़ा है। जबकि भाजपा इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत लगा दी थी और फर्जी वोटिंग को लेकर भी हंगामा हुआ था।
पहले इम्तिहान में जिलाध्यक्ष फेल
यह उपचुनाव जिला भाजपा अध्यक्ष सुंदरलाल शाह के लिए पहला बड़ा इम्तिहान था, जिसमें पार्टी को करारा झटका लगा है। संगठन को साधने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और चुनावी तालमेल बैठाने में नाकामी साफ नजर आई। जिले में भाजपा संगठन की इस हार के बाद जमकर किरकिरी हो रही है। दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सीमित संसाधनों के बावजूद जमीनी संपर्क, घर-घर पहुंच और बूथ पर सतर्कता ने कांग्रेस को जीत दिलाई। यह जीत कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने वाली साबित हुई है। कुल मिलाकर वार्ड 34 का उपचुनाव भाजपा के लिए चेतावनी है। यदि पार्टी ने अब भी अहंकार नहीं छोड़ा, आरएसएस और कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं दिया और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत नहीं किया, तो आने वाले चुनावों में ऐसी हारें दोहराई जाती रहेंगी। यह हार सिर्फ एक वार्ड की नहीं, बल्कि भाजपा संगठन की सोच और कार्यशैली की हार है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

0 Comments