जिला चिकित्सालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी मजबूरी में, 5 साल से नहीं बढ़ी मानदेय दर, महंगाई में आर्थिक संकट गहराया
कर्मचारी कलेक्टर रेट के तहत सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन लगातार महंगाई और बढ़ती दैनिक जरूरतों के बीच उनका वेतन नगण्य साबित हो रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन केवल 9, 125 रुपये प्रति माह है, जिसमें पीएफ कटौती भी नहीं हो रही, जबकि ट्रामा सेंटर और जिले के अन्य अनुशासनिक केंद्रों में भी यही स्थिति बनी हुई है। स्वास्थ्य कर्मियों ने बार-बार मानदेय बढ़़ाने की मांग की है, लेकिन सिविल सर्जन और सीएमएचओ की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिले के ट्रामा सेंटर में ही ऐसे कर्मचारियों की संख्या लगभग दो दर्जन से अधिक है, जो 24 घंटे जनता की सेवा में लगे हुए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि महंगाई व परिवार की आवश्यकताओं को देखते हुए यह वेतन पर्याप्त नहीं है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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