पुलिस स्लोगन को ताक पर रखने बाले गुस्सैल एसआई के बिरुद्ध ज्ञापन
पूर्व में हो चुका गाली गलौज का ऑडियो वायरल
वही हम आपको बता दे कि पूर्व में एक अन्य मामले को लेकर भी गलीगलोज कर एक व्यक्ति को कोतवाली बुलाये जाने का भी ऑडियो वायरल हुआ था। सूत्र की माने तो यह ऑडियो एस.आई राजवीर का था जिनके द्वारा गालीगलोज की जा रही थी। फिल्हाल यह ऑडियो वायरल ऑडियो था। जिसकी पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन मामले में वरिष्ठ अधिकारीयों को जांच जरूर करना चाहिए थी। क्योंकि ऐसे में खाकी सहित जिले के कप्तान (पुलिस अधीक्षक) की छवि पर पर भी असर पड़ रहा है। सभी ने गुरुवार की दोपहर करीब 2 बजे आसपास अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने ज्ञापन दिया और मामले पर उचित कार्रवाई की मांग के साथ सम्बन्धित थाना प्रभारीयो और अधिकारी कर्मचारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देने मांग की है दिया है।
मामले में क्या कहते है वरिष्ठ अधिकारी
पत्रकारों के साथ कवरेज के दौरान मोबाइल कैमरा छीनने का मामला समस्त पत्रकारों द्वारा लिखित रूप से ज्ञापन दिया गया है। टीकमगढ़ द्वारा विधिवत जांच कराई जाएगी और जांच में जो तत्व आएंगे उसे हिसाब से कार्यवाही की जाएगी क्योंकि पूर्व में भी यह तथ्य संज्ञान में लाया गया था। इसमें विधिवत हिदायत दी गई थी। लेकिन यह जो घटनाक्रम है इसकी विधिवत जांच कराई जाएगी एक सप्ताह में एसडीओपी जांच करेंगे।अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह थाने में पत्रकारों के कवरेज से जुड़े नियम कवरेज पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं भारत के कानून में ऐसा कोई नियम नहीं है जो पत्रकारों को थाने में कवरेज करने से पूरी तरह रोकता हो।
पत्रकार सार्वजनिक हित से जुड़ी जानकारी जुटा सकता है। अभद्रता या जबरदस्ती गलत तरीके से पत्रकार का मोबाइल पकड़ना, कैमरा बंद कराना, अपमानजनक शब्द कहना कानूनन गलत है। सुप्रीम कोर्ट व प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने माना है प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल आधार है।
अंदरूनी/संवेदनशील स्थान कवरेज दौरान यदि पुलिस कवरेज रोकती है, तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और लिखित/कानूनी आदेश होना चाहिए, न कि मौखिक धमकी। मालखाना, लॉकअप, केस डायरी, बयान दर्ज करने का समय—इन जगहों पर बिना अनुमति रिकॉर्डिंग रोकी जा सकती है, लेकिन इसका तरीका शालीन और कानून सम्मत होना चाहिए।
संवाददाता :- मुहम्मद ख्वाजा

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