गोवर्धन पूजा एवं महारास कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब


क्षेत्र चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गोवर्धन पूजा एवं महारास कथा का भव्य वर्णन श्रद्धा, आस्था और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। विशाल पंडाल में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कथा स्थल को पुष्प मालाओं, रंगीन गुब्बारों और धार्मिक चित्रों से भव्य रूप से सजाया गया था।

कथावाचक पूज्य आचार्य हेमंत कृष्ण शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने गोवर्धन पर्वत धारण की कथा सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अभिमान को चूर कर ब्रजवासियों की रक्षा की। महाराज जी ने कहा कि गोवर्धन पूजा प्रकृति संरक्षण, कर्म और ईश्वर में अटूट विश्वास का प्रतीक है।

इसके पश्चात महारास प्रसंग का सुंदर वर्णन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि महारास केवल नृत्य नहीं बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य प्रतीक है। रासलीला के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने भक्तों को प्रेम, त्याग, समर्पण और भक्ति का मार्ग दिखाया।

कथा के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा श्रवण करते नजर आए। "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कई श्रद्धालु भक्ति रस में डूबकर झूमते दिखाई दिए।

कार्यक्रम के समापन पर महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आयोजकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

संवाददाता :- देवेंद्र ठाकुर