जनजातीय जूनियर बालक छात्रावास में अव्यवस्थाओं का मामला आया सामने, अधीक्षक की लापरवाही उजागर
मीडिया टीम द्वारा छात्रावास पहुंचकर बच्चों से बातचीत की गई, जिसमें छात्रों ने बताया कि उन्हें निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा है। छात्रों के अनुसार सुबह नाश्ते में केवल बिस्कुट और चाय दी जाती है, दोपहर में कभी चावल-दाल-रोटी तो कभी चावल-दाल-रोटी-सब्जी बनती है, जबकि सेकेंड टाइम में पोहा परोसा जाता है। छात्रों का कहना है कि मीनू में निर्धारित अन्य खाद्य सामग्री उन्हें नहीं दी जा रही, जिससे भोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे गंभीर मामला यह सामने आया कि छात्रावास में दर्ज 38 छात्रों में से 33 छात्र अधीक्षक की जानकारी और अनुमति के बिना बाहर क्रिकेट खेलने चले गए थे। मौके पर छात्रावास में केवल पांच छात्र ही मौजूद मिले। इस बात को स्वयं अधीक्षक द्वारा स्वीकार किया गया, जो उनकी घोर लापरवाही को दर्शाता है।
छात्रावास से बाहर छात्रों के साथ किसी भी प्रकार की अनहोनी होने की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी—यह बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है। अभिभावकों का कहना है कि पूर्व अधीक्षक शरद कोल के कार्यकाल में छात्रावास की व्यवस्थाएं बेहतर थीं और बच्चों की नियमित निगरानी की जाती थी।
वर्तमान अधीक्षक की कार्यशैली से नाराज अभिभावक अब अपने बच्चों को छात्रावास से निकालने की बात कह रहे हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग ऐसे लापरवाह अधीक्षक के खिलाफ कोई कार्रवाई करता है या छात्रावास की स्थिति यूं ही बनी रहती है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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