बैंक मित्रों ने उठाई अपनी आवाज़; प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर रखी 5 सूत्रीय मांगें



मध्यप्रदेश बैंक मित्र संगठन ने बैंक मित्रों (Business Correspondents) की दयनीय आर्थिक स्थिति और असुरक्षित भविष्य को लेकर केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने ग्वालियर सांसद भारत सिंह कुशवाह के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजकर अपनी 5 मुख्य मांगों को जल्द पूरा करने का आग्रह किया है।

समस्याएं: "न्यूनतम मजदूरी से भी कम मिलता है कमीशन"

संगठन का कहना है कि बैंक मित्र ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों तक बैंक की सुविधाएं पहुँचाते हैं। इसके बावजूद उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:

आर्थिक शोषण: बैंकों और निजी कंपनियों द्वारा पारदर्शिता की कमी और मनमानी।

कम आय: कमीशन इतना कम है कि वह न्यूनतम मजदूरी से भी कम बैठता है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है।

सुरक्षा का अभाव: फील्ड में जोखिम भरा काम करने के बावजूद उनके पास कोई बीमा या पेंशन की सुविधा नहीं है।

अस्थायी नौकरी: बिना किसी ठोस कारण के कभी भी काम से हटा दिए जाने का डर बना रहता है।

संगठन की 5 प्रमुख मांगें:

सीधा जुड़ाव: बैंकों और बैंक मित्रों के बीच से बिचौलिया कंपनियों को हटाया जाए और उन्हें सीधे बैंक से जोड़ा जाए।

निश्चित मानदेय: कमीशन के अलावा कम से कम ₹10,000 प्रति माह का स्थायी वेतन दिया जाए या उन्हें 'कुशल श्रमिक' की श्रेणी में रखकर उचित भुगतान हो।

बीमा सुरक्षा: बैंक मित्रों को शासन या बैंक की ओर से कम से कम ₹25 लाख का जीवन और स्वास्थ्य बीमा मिले।

तकनीकी छूट: काम के लिए जरूरी मशीनें और डिवाइस खुले बाजार से खरीदने की अनुमति हो, ताकि कमीशनखोरी रुके।

परिवार को सुरक्षा: किसी बैंक मित्र की मृत्यु होने पर उसके परिवार के योग्य सदस्य को ही बैंक मित्र की आईडी दी जाए।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रजत कुमार शर्मा और प्रदेश महासचिव नारायण प्रसाद तिवारी ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी इन मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी ताकि वे अधिक प्रभावी ढंग से देश की सेवा कर सकें।

संवाददाता :- अंशुल सोनी