सागर सांसद की बीना भाजपा से दूरी या रिफाइनरी को लेकर वर्चस्व की लड़ाई..?
बीना बीपीसीएल के छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भाजपा के अंदर सब कुछ वास्तव में ठीक चल रहा है, या फिर अंदरूनी असंतोष अब सार्वजनिक मंचों तक दिखाई देने लगा है कार्यक्रम में सांसद एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री लता वानखेड़े का लगभग चार घंटे देरी से पहुँचना सिर्फ प्रोटोकॉल की चूक नहीं माना जा सकता इस देरी से न केवल छात्र-छात्राएं परेशान हुए, बल्कि उनके अभिभावकों में भी स्पष्ट नाराज़गी दिखाई दी।
ऐसे कार्यक्रम, जो सीधे बच्चों और उनके भविष्य से जुड़े होते हैं, उनमें समयबद्धता और संवेदनशीलता सबसे पहली अपेक्षा होती है वहीं दूसरी ओर भाजपा नेतृत्व की अनुपस्थिति को लेकर खड़ा हुआ हो गया है बीना विधानसभा क्षेत्र के पांचों मंडल अध्यक्ष, विधायक, जनपद अध्यक्ष, नगरपालिका अध्यक्ष तथा अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों का कार्यक्रम से दूर रहना केवल संयोग नहीं माना जा रहा यदि कार्यक्रम की सूचना समय पर नहीं दी गई तो यह प्रबंधन की गंभीर विफलता है और यदि सूचना के बावजूद दूरी बनाई गई तो यह राजनीतिक असंतोष का संकेत है
सूत्रों के अनुसार, रिफाइनरी प्रबंधन के साथ सांसद की कुछ बैठकों को लेकर पहले से ही स्थानीय भाजपा नेताओं में असंतोष की चर्चा रही है। ऐसे में जब बीना जैसी विधानसभा में भाजपा के कई पूर्व विधायक, वरिष्ठ संगठन पदाधिकारी और अनुभवी नेता मौजूद हों, और फिर भी कार्यक्रम में गिने-चुने लोगों की उपस्थिति दिखे, तो यह केवल आयोजन की कमी नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह केवल समन्वय की कमी है, या फिर बीना भाजपा में चल रही अंदरूनी खींचतान का सार्वजनिक रूप? यदि पार्टी नेतृत्व समय रहते इन संकेतों को नहीं समझता, तो आने वाले समय में यह असंतोष और गहरा हो सकता है।


0 Comments