कोयले की उड़ती राख से घिरा मोरवा, सैकड़ों परिवार प्रदूषण की चपेट में


सिंगरौली  मोरवा स्थित शुक्ला मोड़ इन दिनों धूल और कोयला डस्ट के घने गुबार में डूबा नजर आ रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि राहगीरों को दिन में भी हेडलाइट जलाकर चलना पड़ रहा है। सड़क पर गुजरते भारी वाहनों से उड़ती कोयले की महीन राख आसपास के रहवासियों के लिए मुसीबत बन चुकी है। सैकड़ों परिवार रोजाना प्रदूषण की मार झेलने को मजबूर हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शुक्ला मोड़ से लगातार कोयला परिवहन होता है, लेकिन सड़क पर पानी का नियमित छिड़काव नहीं किया जाता। नतीजतन हर गुजरते ट्रक के साथ धूल का बड़ा गुबार उठता है, जो घरों, दुकानों और स्कूलों तक पहुंच रहा है। कई लोगों को सिरदर्द, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत हो रही है। बच्चों और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है।  

सवालों के घेरे में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण

रहवासियों का आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। जिम्मेदार विभाग और एनसीएल प्रबंधन इस गंभीर समस्या पर ठोस इंतजाम करने में विफल साबित हो रहे हैं। सड़क किनारे धूल की मोटी परत जमी है, जिससे बाइक सवार और पैदल चलने वाले लोग हर समय दुर्घटना के खतरे में रहते हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पानी का नियमित छिड़काव, सड़क की मरम्मत और ओवरलोड वाहनों पर सख्ती नहीं की गई तो स्थिति और भयावह हो सकती है। शुक्ला मोड़ का यह नजारा विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और एनसीएल प्रबंधन जागता है या मोरवा के लोग यूं ही प्रदूषण की मार झेलते रहेंगे।

संवाददाता :- आशीष सोनी