क्या सुरक्षित है बेटियाँ ? 6 साल में लाखों गुमशुदगी के मामलों ने खड़े किए सवाल,मध्यप्रदेश में 6 साल में 2.70 लाख महिलाएँ लापता, 68 हजार का अब तक सुराग नहीं



मध्यप्रदेश में वर्ष 2020 से फरवरी 2026 के बीच महिलाओं और किशोरियों के लापता होने के आंकड़ों ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 2 लाख 70 हजार से अधिक महिलाएँ और किशोरियाँ गुमशुदा दर्ज की गईं। औसतन हर दिन 125 से ज्यादा मामलों का पंजीयन हुआ।

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इनमें से 2 लाख से अधिक मामलों में महिलाओं और किशोरियों को खोज लिया गया है, लेकिन लगभग 68 हजार अब भी लापता हैं। यह आंकड़ा हजारों परिवारों की चिंता और इंतजार को दर्शाता है।

पुलिस रिपोर्ट में उल्लेख है, कि करीब 48 प्रतिशत किशोरियाँ घर से नाराज होकर चली जाती हैं, जबकि कुछ मामले प्रेम संबंधों से जुड़े पाए जाते हैं। हालांकि सामाजिक संगठनों का कहना है कि सभी मामलों को केवल पारिवारिक विवाद या व्यक्तिगत कारणों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।मानव तस्करी और संगठित अपराध की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

इस मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उनके अनुसार इतने बड़े स्तर पर महिलाओं का लापता होना कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

वहीं सरकार का दावा है, कि गुमशुदगी के मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है और अधिकांश मामलों में सफलता मिली है। पुलिस विभाग का कहना है कि तकनीकी निगरानी और विशेष अभियानों के माध्यम से लगातार खोजबीन जारी है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में महिलाएँ और किशोरियाँ क्यों लापता हो रही हैं क्या यह केवल सामाजिक समस्या है या सुरक्षा तंत्र में कहीं गंभीर कमी है।

यह मुद्दा आंकड़ों से आगे बढ़कर समाज और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है....

संवाददाता :- राजकुमारी ठाकुर