प्लानटेशनों की कागजों में हुई निदाई-गुड़ाई ,परिक्षेत्र अधिकारी साधे चुप्पी, वन विभाग की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार बरहपान, उर्ती, अमिलिया तथा घोनी बीट के करसुआ क्षेत्र के आरएफ कम्पार्टमेंट क्रमांक 381, 384, 385, 386, 353, 354, 352, 409, 407, 402, 403, 398 और 396 में वन विभाग द्वारा पौधरोपण कराया गया था। इस योजना का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र को समृद्ध करना था, लेकिन अब इस पूरे कार्य में गड़बड़ी की गंभीर आशंका जताई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि पौधरोपण के बाद प्लांटेशन के रखरखाव, प्रथम, द्वितीय और तृतीय निदाई-गुड़ाई तथा साफ.-सफाई के नाम पर लाखों से लेकर करोड़ों रुपए तक की राशि खर्च दिखाई गई है। जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरित बताई जा रही है। कई स्थानों पर पौधों की स्थिति दयनीय है और रखरखाव का कोई ठोस प्रमाण नजर नहीं आता। प्लानटेशन में घास, झाड़ियां काफी मात्रा में नजर आ रही हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार खर्च दिखाए गए करोड़ों रुपए कहां गए। सबसे गंभीर आरोप मास्टर रोल को लेकर सामने आया है। सूत्रों का दावा है कि रखरखाव कार्य में वास्तविक श्रमिकों को शामिल नहीं किया गया, बल्कि कुछ चुनिंदा लोगों के नाम मास्टर रोल में दर्ज कर भुगतान दिखाया गया। इस तरह कथित रूप से कागजों में ही कार्य कराकर राशि का बंदरबांट किया गया, बताया जा रहा है कि कई श्रमिकों को इस कार्य की जानकारी तक नहीं है, जबकि उनके नाम से भुगतान दर्ज है। सूत्रों का यह भी कहना है कि यह गड़बड़ी केवल एक या दो बीट तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिकांश क्षेत्रों में इसी तरह का खेल हुआ है। हालांकि चर्चाओं के अनुसार वन परिक्षेत्र बैढ़न में अनियमितताओं की संख्या और स्तर अधिक गंभीर है। प्लांटेशन की देखरेख और साफ.-सफाई का कार्य कागजों में तो नियमित रूप से दर्शाया गया, लेकिन मौके पर वास्तविक कार्य नहीं हुआ। इस पूरे मामले में वन परिक्षेत्र अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वहीं उक्त मामले में निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सकेगी। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
खर्च राशि की कराई जाए उच्च स्तरीय जांच: राजेश
आम आदमी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश सोनी ने कहा है कि बैढ़न ही नही बल्कि, पूरे जिले में प्लानटेशनों के रखरखाव में व्यापक पैमाने पर अनियमितताएं किये जाने की शिकायतें मिल रही हैं। पौधों के निदाई-गुड़ाई में फर्जीवाड़ा किया गया है, ऐसी चर्चाएं हैं। प्रथम से लेकर तृतीय चरण में वन अधिकारियों ने अनियमितता किया है। उन्होंने सीसीएफ का ध्यान आकृष्ट कराते हुये उक्त मामले की उच्च स्तरीय जांच कराये जाने की मांग है।
वन परिक्षेत्राधिकारी ने नही दिया कोई जवाब
आरोप है कि बिना उनकी जानकारी और सहमति के इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। जब इस संबंध में उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। यहां तक कि व्हाट्सएप के माध्यम से भी संपर्क करने के बावजूद उनका जवाब नहीं आया। उनकी इस चुप्पी से संदेह और गहरा गया है। पर्यावरण और वन संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य में इस तरह की अनियमितता सामने आने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य के साथ भी बड़ा धोखा है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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