बीछी-खरखौली से बगदरा तक पक्की सड़क कब बनेगी, चितरंगी तहसील से जुड़ा है मामला  


 चितरंगी तहसील क्षेत्र के संजय नेशनल पार्क अभ्यारण बगदरा अंतर्गत बीछी-खरखौली से लेकर बगदरा-कुलकवार तक की सड़क आज भी विकास की बाट जोह रही है। यह सड़क अब सड़क कम और धूल, गड्ढों व हादसों का गलियारा ज्यादा बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि यहां से गुजरना मजबूरी तो है, लेकिन सुरक्षित बिल्कुल नहीं। सड़क पर उड़ती धूल के गुबार और खाईनुमा गड्ढे हर दिन किसी न किसी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं।

गौरतलब है कि बीछी से बगदरा-कुलकवार के इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों ग्रामीण, छात्र, मजदूर और जनप्रतिनिधि गुजरते हैं। गर्मी हो या बरसात, हालात बद से बदतर हैं। सूखे मौसम में धूल का ऐसा गुबार उड़ता है कि सामने चल रहा वाहन तक दिखाई नहीं देता, वहीं बारिश में यही सड़क कीचड़ और गहरे गड्ढों में तब्दील हो जाती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह रास्ता किसी जोखिम भरे ट्रैक से कम नहीं। इधर करीब 8 वर्ष पूर्व डिस्ट्रिक्ट मिनिरल फण्ड से बीच-बीच में पीसीसी सड़क एवं बीछी से कुलकवार-बगदरा तक डब्ल्यूबीएम सड़क का निर्माण जरूर हुआ था, लेकिन वह भी ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हुआ। कुछ सौ मीटर की पक्की पट्टियां आज टूट-फूट का शिकार हैं और बाकी पूरा मार्ग कच्चा ही पड़ा है। सवाल यह है कि जब डीएमएफ का पैसा उपलब्ध था तो पूरी सड़क क्यों नहीं बनाई गई। यहां के नागरिक भाजपा सरकार को कोसने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे हैं।

बगदरावासी मजबूर, इसी कच्ची सड़क से गुजरने को विवश

विडंबना यह है कि चितरंगी विकास खण्ड के दूरस्थ क्षेत्र खरखौली से लेकर बगदरा तक के रहवासियों को इसी जर्जर सड़क से गुजरना पड़ रहा है। इसके बावजूद सड़क की हालत पर किसी का ध्यान नहीं जाना, यह प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण है। अगर अधिकारी स्वयं इस परेशानी को झेल रहे हैं, तो आम ग्रामीणों की पीड़ा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वहीं बिछी खरखौली से लेकर बगदरा तक पक्की सड़क कब बनेगी, इस सवाल का जवाब न आज है, न कल दिखता है। ग्रामीणों में धीरे-धीरे असंतोष बढ़ता जा रहा है और अब वे आंदोलन की बात करने लगे हैं। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह सड़क नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी की स्थायी पहचान बन जाएगी।

जनप्रतिनिधि और अधिकारी: सबके पास बहाने

ग्रामीणों का आरोप है कि इस सड़क को लेकर न तो किसी जनप्रतिनिधि ने गंभीरता दिखाई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने हर बार बजट नहीं होने का बहाना बनाया गया, लेकिन 8 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी वही राग अलापा जा रहा है। न कोई ठोस कार्ययोजना, न कोई समयसीमा-सिर्फ  आश्वासन। बगदरा अंचल के कई रहवासियों का आरोप है कि इस क्षेत्र के साथ हमेशा से सौतेला व्यवहार सरकार के साथ-साथ जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है। देश के स्वतंत्र हुये करीब 78 साल पूरे होने के बावजूद बगदरा अंचल के  कई गांव अभी भी पक्की सड़कों से अछूते हैं। जबकि जिले में डीएमएफ फण्ड पर्याप्त है। नेताओं की अच्छी तरह से सोच नही बदली है। जिसके चलते बगदरा अंचल विकास का बाट जोह रहा है।

संवाददाता :- आशीष सोनी