अवैध उत्खनन प्रतिबंधित, फिर रेत पहुंची कैसे गांव, अधिकारियों पर खड़े हो रहे सवाल
सिंगरौली सोन घड़ि़याल अभ्यारण्य क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। कई प्रबुद्ध नागरिकों का आरोप है कि अभ्यारण्य क्षेत्र से सटे इलाकों में सोन नदी से रेत की चोरी अधिकारियों की कथित मेहरबानी से हो रही है।
पिछले वर्ष 15 दिसंबर को गढ़वा पुलिस ने बगदरा क्षेत्र के नैकहवा गांव में रेत से भरे एक टीपर वाहन को पकड़कर विभिन्न बीएनएस धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। करीब डेढ़ माह पूर्व एक ट्रैक्टर पर भी कार्रवाई हुई थी। इन घटनाओं ने यह संकेत दिया कि क्षेत्र में अवैध परिवहन सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक बाद में अभ्यारण्य एवं संबंधित अधिकारियों की ओर से यह कहकर क्लीन चिट दे दी गई कि जप्त रेत सोन नदी यानी अभ्यारण्य क्षेत्र की नहीं है। यही तर्क अब सवालों के घेरे में है। यदि रेत अभ्यारण्य की नहीं थी, तो फिर नैकहवा जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में इतनी मात्रा में रेत पहुंची कैसे?
माफिया को बचाने वसूलते हैं मोटी रकम
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब अभ्यारण्य क्षेत्र में अवैध उत्खनन और परिवहन पूर्णत: प्रतिबंधित है, तो फिर इस प्रकार की घटनाएं बार-बार क्यों सामने आ रही हैं, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ अधिकारी रेत माफियाओं को बचाने के लिए कथित रूप से मोटी रकम वसूलते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बार-बार क्लीन चिट दिए जाने से संदेह और गहरा रहा है। सूत्र बताते हैं कि अधिकारी भले ही बदलते हैं कि लेकिन कामकाज पुराने तर्ज पर ही किया जाता है । अब मांग उठ रही है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि रेत का स्रोत क्या है और कहीं अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध तो नहीं। यदि समय रहते पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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