अपनी ही सरकार के सिस्टम पर देवसर विधायक का करार प्रहार मंच से फूटा जनप्रतिनिधि का गुस्सा



नीति आयोग के संपूर्णता अभियान 2.0 की औपचारिक शुरुआत जिस सरकारी मंच से विकास के दावे गिनाने के लिए की गई थी, वही मंच अटल बिहारी सामुदायिक भवन बिलौंजी में  सरकारी सिस्टम की पोल खोलने का अखाड़ा बन गया। देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम ने सैकड़ों लोगों और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अपनी ही सरकार के तंत्र पर तीखा हमला बोला। 

विधायक मेश्राम ने दो टूक कहा कि सरकारी फाइलों में जो विकास दिखाया जा रहा है, वह जमीनी हकीकत से कोसों दूर है। शिक्षा व्यवस्था को कटघर्रे में खड़ा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। उपस्थिति रजिस्टर पर घर बैठे हस्ताक्षर हो रहे हैं और बच्चों का भविष्य सिर्फ  कागजों में संवारा जा रहा है। वहीं स्वास्थ्य व्यवस्था पर विधायक के शब्द और भी तीखे थे। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में न तो समय पर दवाइयाँ मिलती हैं और न ही मरीजों को समुचित इलाज। योजनाओं के नाम पर आंकड़े पेश किए जाते हैं, लेकिन जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए भटकते रहते हैं। यह स्थिति उस जिले में है जो वर्षों से नीति आयोग की निगरानी में है। आंगनबाड़ी व्यवस्था पर बोलते हुए विधायक ने कहा कि बच्चों को न तो तय मानकों के अनुसार पोषण मिल पा रहा है और न ही सेवाएं। सरकारी रिपोर्टें भले ही संतोषजनक तस्वीर पेश करती हों,  लेकिन जमीनी स्तर पर हालात गंभीर हैं।

विधायक के बयानों से अधिकारी दिखे असहज

विधायक के इन बयानों से मंच पर मौजूद अधिकारी असहज दिखाई दिए। वहीं कार्यक्रम में मौजूद आम लोगों ने तालियाँ बजाकर विधायक के बयान का समर्थन किया। यह तालियाँ केवल समर्थन नहीं थीं, बल्कि सिस्टम के प्रति जनता की नाराजगी की आवाज थीं। स्थिति संभालने के प्रयास में कलेक्टर गौरव बैनल ने सफाई देते हुए कहा कि संपूर्णता अभियान 2.0 के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास सहित छ: प्रमुख बिंदुओं पर कार्य शुरू कर दिया गया है और मैदानी अमले को प्रशिक्षण भी दिया गया है। 

सरकारी दावों पर गंभीर सवाल 

हालांकि बड़ा सवाल यह है कि यदि सब कुछ ठीक चल रहा है, तो फिर सत्तारूढ़ दल के विधायक को सार्वजनिक मंच से अपने ही प्रशासन को कठघर्रे में खड़ा करने की जरूरत क्यों पड़ी ? गौरतलब है कि सिंगरौली वर्ष 2018 से नीति आयोग के पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है। इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार न होना सरकारी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। देवसर विधायक द्वारा उठाए गए ये मुद्दे सिर्फ  भाषण नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए चेतावनी हैं। यदि अब भी कागजी प्रगति के सहारे काम चलता रहा, तो योजनाएँ केवल मंचों और रिपोर्टों तक ही सीमित रह जाएंगी। जनता अब जवाब चाहती है और वह भी जमीन पर दिखने वाला।


संवाददाता :- आशीष सोनी