न्याय नहीं मिलने पर बेरोजगार युवा चढ़ा मोबाइल टावर पर, हक मांगने पर नोटिस देकर काम से निकला


सिंगरौली जिले में प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर आए दिन वर्करो द्वारा शोषण करने के आरोप लगते रहे हैं। अब बरगवां थाना क्षेत्र के खरखटा गांव में एक बेरोजगार युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया और न्याय न मिलने पर आत्महत्या की चेतावनी दी। युवक का आरोप है कि एनसीएल के ब्लॉक-बी में ठेका व्यवस्था के तहत काम करने के दौरान क्लाउड टेक कंपनी ने उसका एटीएम और पासबुक अपने पास रखकर वेतन में हेरफेर की, जबकि पीएफ राशि में भी गड़बड़ी की गई। बार-बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से आक्रोशित होकर उसने यह कदम उठाया।

पीड़ित विजय कुमार पनिका के अनुसार नौकरी दिलाने के नाम पर कंपनी से जुड़े लोगों ने शुरुआत में ही उसके बैंक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। मोबाइल मैसेज में हर माह करीब 20 हजार रुपये वेतन आने की सूचना मिलती रही, लेकिन खाते से रकम निकालकर उसे मात्र 10 हजार 500 रुपये दिए जाते थे। इतना ही नहीं उसके पीएफ खाते में किसी अन्य व्यक्ति का विवरण जोड़ दिया गया। विजय का कहना है कि उसने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन और जनसुनवाई में की, यहां तक कि गौरव बैनल से भी गुहार लगाई, लेकिन समाधान के बजाय उसे नोटिस देकर नौकरी से बाहर कर दिया गया। घटना के दिन सुबह से ही युवक टावर पर चढ़ा रहा और वीडियो जारी कर अपने गांव को आखिरी बार दिखाने की बात कही। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और उसे समझाने की कोशिशें शुरू की गईं। स्थानीय पुलिस का कहना है कि संबंधित कंपनी के अधिकारियों को भी बुलाया गया है, ताकि युवक की शिकायतों पर तत्काल बातचीत कर समाधान निकाला जा सके। हालांकि क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि यदि समय रहते वेतन और पीएफ से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होती, तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। इस घटना ने जिले में ठेका श्रमिकों की सुरक्षा, वेतन भुगतान की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। 

जिले में बढ़ रही, टावर में चढ़कर विरोध की घटनाएं

श्रमिक संगठनों का आरोप है कि ठेका कंपनियां बैंक दस्तावेज अपने पास रखकर भुगतान प्रक्रिया को अपारदर्शी बनाती हैं, जिससे कर्मचारियों को वास्तविक वेतन का पता नहीं चल पाता। वहीं, पीएफ में कथित गड़बड़ी ने श्रम कानूनों के पालन पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। हाल के महीनों में सिंगरौली में टावर पर चढ़कर विरोध दर्ज कराने की घटनाएं बढ़ी हैं, जो व्यवस्था पर अविश्वास का संकेत मानी जा रही हैं। प्रशासन ने मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है, लेकिन सवाल वही है, क्या पीड़ित को न्याय मिलेगा या यह घटना भी आश्वासनों के बीच दब जाएगी। फिलहाल, पूरे जिले की नजरें इस पर टिकी हैं कि श्रमिक के वेतन और पीएफ से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच कब और कैसे होती है।

संवाददाता :- आशीष सोनी