तप की पराकाष्ठा: माँ ब्रह्मचारिणी और 16 साल का मौन संकल्प
"आज नवरात्रि का दूसरा दिन है—माँ ब्रह्मचारिणी का। 'ब्रह्म' यानी तपस्या और 'चारिणी' यानी आचरण करने वाली। ज्योतिष के अनुसार आज का दिन चंद्रमा (Moon) को समर्पित है, जो हमारे 'मन' का स्वामी है। माँ ब्रह्मचारिणी सिखाती हैं कि जीत सिर्फ शोर मचाने से नहीं, मन की शांति और 'अटूट धैर्य' से मिलती है।"
"पौराणिक कथाओं में माँ ब्रह्मचारिणी ने हज़ारों सालों तक नंगे पैर, धूप और बारिश में केवल फल-फूल खाकर तपस्या की। जब दुनिया ने कहा—'हार मान लो, यह असंभव है', तब उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया और 'अपर्णा' कहलाईं। उनका यह 'तप' ही था जिसने अंत में महादेव को भी झुका दिया।"
"ऐसी ही एक 'तपस्या' हमारे आधुनिक युग में देखी गई। एक महिला—इरोम चानू शर्मिला। साल 2000 में उन्होंने एक संकल्प लिया और अगले 16 साल तक अन्न का एक दाना भी अपनी जुबान पर नहीं रखा। 16 साल का लंबा उपवास! सरकार ने उन्हें ज़िंदा रखने के लिए उनकी नाक में नली डाल दी, ताकि उन्हें लिक्विड डाइट दी जा सके। लेकिन उनका 'तप' नहीं डगमगाया।"
"लोग उन्हें 'आयरन लेडी' कहने लगे, दुनिया उनकी उम्र और उनकी सेहत की 'फिकर' जताती रही, पर वो अपने लक्ष्य पर अडिग रहीं। 16 साल का वो इंतज़ार सिखाता है कि अगर मन में 'ठहराव' हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हें तोड़ नहीं सकती।"
"अक्सर हम थोड़े से इंतज़ार में घबरा जाते हैं। अगर एक-दो साल में सफलता न मिले, तो लोग हमें 'बेचारी' समझने लगते हैं। पर याद रखिये, माँ ब्रह्मचारिणी का संदेश साफ है—संघर्ष कितना भी लंबा हो, अगर तुम्हारा 'चरित्र' और 'संकल्प' सच्चा है, तो विजय निश्चित है।"
"अपनी फिकर को अपनी 'तपस्या' में बदलो। दुनिया को तुम्हारी उम्र की चिंता करने दो, तुम बस अपने शिखर की ओर बढ़ती रहो। क्योंकि तुम खुद एक शक्ति हो।
क्या आपकी लाइफ में भी कोई ऐसा सपना है जिसके लिए आप 'तप' कर रही हैं?
संवाददाता :- मोनिका शर्मा
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