‘कागज पर 2 एकड़, जमीन पर 50 एकड़ पर खनन,बड़कुड़ खदान पर उठे बड़े सवाल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा



सिंगरौली। जिले के बड़कुड़ गांव में संचालित पत्थर खदान अब गंभीर विवादों में घिरती नजर आ रही है। सीमित लीज के बावजूद बड़े पैमाने पर खनन किए जाने के आरोपों ने पूरे मामले को तूल दे दिया है।

ग्रामीणों का दावा है कि जहां खनन के लिए महज 2 एकड़ 10 डिसमिल भूमि की अनुमति दी गई है, वहीं हकीकत में 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में खुदाई की जा रही है। आरोप है कि बी. अग्रवाल एंड कम्पनी द्वारा नियमों को नजरअंदाज कर खनन गतिविधियों का विस्तार किया गया है।

प्रशासन पर उठे सवाल, कार्रवाई क्यों नहीं?

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने राजनीतिक प्रभाव के चलते मामले में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

पर्यावरण पर खतरा, नाले तक पहुंचा खनन

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि खनन कार्य शासकीय नाले के पास तक पहुंच गया है। इससे जल प्रवाह प्रभावित होने और आसपास के खेतों में जलभराव या सूखे की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य में पर्यावरण असंतुलन का कारण बन सकती है।

सुरक्षा इंतजाम नदारद, हादसे का खतरा   

खनन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गहरी खाई और सुरक्षा घेरा न होने से मजदूरों और स्थानीय लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।

राजस्व नुकसान की आशंका 

लीज क्षेत्र से बाहर खनन होने के कारण सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है। जानकारों के अनुसार, अवैध खनन से रॉयल्टी की चोरी होती है, जिससे शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान हो सकता है।

ग्रामीणों की चेतावनी—अब आंदोलन होगा 

ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब नजर प्रशासन पर 

यह मामला न सिर्फ खनन नियमों के उल्लंघन का संकेत देता है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या अवैध खनन पर वास्तव में रोक लग पाती है।

संवाददाता :- आशीष सोनी