जिले के 60 फीसदी 108 एम्बुलेंस,जननी वाहन खटारा,जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त

जिले में संचालित 108 एंबुलेंस और जननी वाहनों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। करीब तीन दर्जन वाहनों में से लगभग 60 फीसदी लंबे समय से खराब  हैं। कई एंबुलेंस महीनों से सड़कों पर उतरने की बजाय खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।

108 एंबुलेंस सेवा को आम जनता के लिए जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी भयावह है, जहां एंबुलेंस की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को निजी वाहनों या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से गंभीर परिणाम सामने आने की आशंका बढ़ गई है। वहीं जननी एक्सप्रेस सेवा, जो गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए चलाई जाती है, वह भी बदहाल है। कई वाहन खराब होने के कारण प्रसव पीड़ि़त महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने की वजह से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। एम्बुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी जय अंबे इमरजेंसी सर्विसेज पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी वाहनों के रखरखाव को लेकर पूरी तरह उदासीन बनी हुई है। लंबे समय से खराब पड़े वाहनों की मरम्मत तक नहीं कराई जा रही, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि आखिर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की जा रही। साथ ही यह भी आरोप सामने आ रहे हैं कि कंपनी को समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में खर्च कम करने की नीति पर काम कर रही है, जिसके चलते ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। 

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त

इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस नेता एवं पूर्व जिलाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता का कहना है कि सरकार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण आम जनता की जान जोखिम में पड़ गई है। उन्होंने मांग की है कि खराब एंबुलेंस वाहनों को तत्काल दुरुस्त किया जाए और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। जिले में एंबुलेंस सेवाओं की बदहाली ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया,तो आने वाले दिनों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं, जिसका सीधा असर आम नागरिकों की जिंदगी पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार भले ही कुछ भी दावा करें, लेकिन धरातल पर स्वास्थ्य व्यवस्था अस्त-व्यस्त है। 

कंपनी नही है गंभीर, स्वास्थ्य सेवा पर असर

आरोप लगाया जा रहा है कि जय अम्बे इमरजेंसी एम्बुलेंस कंपनी गंभीर नही है। करीब 80 फीसदी इमरजेंसी वाहनों के खराब होने पर तरह-तरह के सवाल खड़े किये जा रहे हैं। चर्चा इस बात की है कि जब इतनी संख्या में एम्बुलेंस एवं जननी वाहन खराब हैं, फिर भोपाल में बैठे स्वास्थ्य विभाग का आलाधिकारी क्या कर रहे हैं। कंपनी पर दबाव बनाने से पीछे क्यों हट रहे हैं या फिर यह भी सवाल उठाया जा  रहा है कि कंपनी अपनी कमियों को छुपाई हुई है और इसकी मॉनिटरिंग करने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आलाधिकारियों तक बात नही पहुंचा रहे हैं। जिसके चलते 108 एम्बुलेंस एवं जननी वाहनों की यह हालत हुई है। यहां बताते चले कि सिंगरौली जिला का अधिकांश भाग ग्रामीण क्षेत्रों में है। जिसके चलते यहां भोगौलिक स्थिति अलग है। इस लिहाज से इमरजेंसी वाहनों को ठीक-ठाक रखना चाहिए। 

संवाददाता:–आशीष सोनी