ताला बंद पंचायत, कागज़ों में विकास? हरपालपुरा में जिम्मेदारों की खुली पोल



दमोह जिले की पटेरा तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत हरपालपुरा की पंचायत व्यवस्था इन दिनों सवालों के घेरे में है। सरपंच पं. दिनेश प्रसाद डिम्ही पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, कि पंचायत भवन निर्धारित समय में भी बंद रहता है। ग्रामीण जब अपने जरूरी कार्यों से पहुंचे, तो दरवाजे पर ताला लटका मिला मानो विकास भी उसी ताले में कैद हो गया हो।

पंचायत भवन के अंदर का नज़ारा और भी चौंकाने वाला था। फाइलें बिखरी पड़ीं, कुर्सियां अस्त-व्यस्त, दीवारों से झड़ता प्लास्टर और परिसर में फैली गंदगी ये तस्वीर किसी शासकीय कार्यालय की नहीं, बल्कि बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रही हैं भवन के सामने बैठे मवेशी मानो प्रशासनिक लापरवाही पर मूक गवाही दे रहे हों।

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत न तो नियमित रूप से खुलती है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी समय पर उपलब्ध रहता है। शिकायतें सुनने वाला कोई नहीं, योजनाओं की जानकारी देने वाला कोई नहीं, और धरातल पर विकास कार्यों का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है, लेकिन धुंधले बिल लगे है और पैसा भी निकाला गया है पर सरपंच ने धरातल पर कोई भी काम नहीं करवाया है।

अब बड़ा सवाल यह है 

अगर पंचायत भवन में ताला लटका है, तो गांव के विकास की निगरानी कौन करेगा

क्या योजनाएं सिर्फ कागजों में पूरी दिखाई जा रही हैं

क्या जिम्मेदारों को ग्रामीणों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं

हरपालपुरा पंचायत की यह स्थिति स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है शासकीय भवन की यह दुर्दशा न केवल जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल उठाती है, बल्कि ग्रामीण प्रशासन की विश्वसनीयता को भी कठघरे में खड़ा करती है।

अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर विकास की फाइलें यूं ही धूल फांकती रहेगी।

संवाददाता :- राजकुमारी ठाकुर