होली – रंगों और उल्लास का त्योहार 


होली भारत का प्रमुख और आनंदमय त्योहार है। यह हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली मनाने की पौराणिक कथा यह है कि राक्षस हिरण्यकशिपु अपने ही पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका को आग में बैठने का आदेश दिया था क्योंकि होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी। लेकिन विष्णु भक्त प्रहलाद सुरक्षित रहे और होलिका जल गई। यह घटना बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक रही।

होली भाईचारे का पर्व है एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाना, गले लगाना और मिठाइयाँ से खुशियां बांटना। बच्चों का पिचकारी में रंगो के साथ खूब आनंद लेना । घरों में कई तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाना, और घर, परिवार के साथ बैठ कर खाना यही तो है रंग बिरंगी होली।

रंगों के जगह प्राकृतिक फूलों का उपयोग ज्यादा अच्छा 

रंगो से पर्यावरण की सुरक्षा कर, प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग करना चाहिये,पानी का सीमित उपयोग करना तथा सभी के साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार करने का प्रतीक है होली का त्यौहार।

आपसी प्रेम और भाई चारे का प्रतीक 

होली का त्यौहार आपसी भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का संदेश देती है। यह रंगों का त्यौहार एक बड़ा सन्देश यह भी देता है कि जिस तरह से कई रंग मिल जाते है, ठीक उसी तरह से हमें अपने सुख दुःख क़ो आपस में बाँट कर समाज में एक नया मुकाम स्थापित कर हमें यह पर्व हर्षोल्लास और शांति के साथ मनाना चाहिए।

संवाददाता :- रविता विश्वकर्मा