ऊर्जा नगरी में महिला शक्ति का उदय: 'ललिता सेवा संस्थान' का आगाज, समाज सेवा के नाम पर जुटा दिग्गजों का जमावड़ा


जब समाज की मुख्यधारा से कटे हुए लोगों को न्याय और सहायता की दरकार होती है, तब किताबी दावों से धरातल पर उतरकर काम करने वाली संस्थाओं की जरूरत महसूस होती है। इसी संकल्प के साथ 26 मार्च 2026 को सिंगरौली की धरती पर 'ललिता सेवा संस्थान' का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ।

संस्थान की अध्यक्ष सुषमा वर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया कि अब समाज सेवा केवल नारों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिकारों की लड़ाई को नई धार दी जाएगी।

सत्ता और रसूख का संगम: महापौर समेत कई दिग्गजों की मौजूदगी

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सिंगरौली महापौर रानी अग्रवाल की उपस्थिति ने कार्यक्रम के राजनैतिक और सामाजिक वजन को और बढ़ा दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक औपचारिक फीता कटाई थी? उपस्थित वक्ताओं के तेवरों ने स्पष्ट कर दिया कि 'ललिता सेवा संस्थान' व्यवस्था की खामियों को उजागर करने और दबे-कुचले वर्गों की आवाज बनने के लिए मैदान में उतरा है।

विशिष्ट हस्तियों ने भरी हुंकार

कार्यक्रम में शिक्षा, कानून और राजनीति जगत की प्रखर आवाजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:

कानूनी मोर्चे पर: एडवोकेट रेणु पुरी और एडवोकेट वंदना सिंह ने साफ किया कि संस्थान कानूनी पेचीदगियों में फंसे पीड़ितों के लिए ढाल बनेगा।

शिक्षा और चिकित्सा: डॉ. नीतू वर्मा और शिक्षिका सुनीता सांवले ने समाज के बौद्धिक उत्थान पर जोर दिया।

राजनैतिक प्रतिनिधित्व: कांग्रेस पार्टी की ओर से संगीता सिंह ने अपनी उपस्थिति से सत्ता और विपक्ष के बीच जनहित के मुद्दों को उठाने का संकेत दिया। साथ ही सोनम कुमारी, सोनम रवानी, सुनीता, सुभाष कुंवर, ललिता, एवं अजाक्स के तरफ से कई छात्राएं भी शामिल हुई जिससे संस्थान की जमीनी पकड़ को मजबूती दी।

कड़े संदेश के साथ शुरुआत

संस्थान की अध्यक्ष सुषमा वर्मा ने अपने संबोधन में बिना लाग-लपेट के यह स्पष्ट कर दिया कि 'ललिता सेवा संस्थान' का उद्देश्य केवल दफ्तर खोलना नहीं, बल्कि उन ताकतों को चुनौती देना है जो मानवता और न्याय के आड़े आती हैं।

बड़ी बात: "सेवा का अर्थ केवल सहायता करना नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना भी है।" यह इस उद्घाटन समारोह का मुख्य स्वर रहा।

संवाददाता :- आशीष सोनी