नवानगर पुलिस पर लग रहा 'रिश्वतखोरी' का आरोप, क्या न्याय के लिए जरुरी हुआ चढ़ावा
"वीडियो तो नहीं बना रहे?" – रिश्वत लेते समय पुलिस का डर
हैरानी की बात यह है कि रिश्वत लेते समय पुलिसकर्मी के मन में कानून का नहीं, बल्कि पकड़े जाने का डर था। पीड़ित का आरोप है कि पैसे जेब में रखते वक्त पुलिसकर्मी ने बाकायदा पूछा— “वीडियो तो नहीं बना रहे हो?” यह सवाल खुद चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। अफसोस इस बात का है कि लक्ष्मी दर्शन के बावजूद पीड़ित को न्याय की जगह सिर्फ दुत्कार मिली।
दबंगों के हौसले बुलंद: "पुलिस क्या कर लेगी?"
भकुआर गांव में हुई मारपीट की घटना का वीडियो नवानगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर तमाचा है। वीडियो में दबंग बेखौफ होकर कह रहे हैं कि “पुलिस क्या कर लेगी, हमें कोई डर नहीं है।” जब अपराधियों को खाकी का खौफ ही न रहे, तो समझा जा सकता है कि उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि नवानगर पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय दबंगों को ढाल प्रदान की है।
न्याय की गुहार पर 'सिस्टम' का दबाव
थाने से निराश होकर पीड़ित ने जब CM हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाया, तो वहां भी उसे राहत मिलने के बजाय प्रताड़ना मिल रही है। अब पुलिस प्रशासन द्वारा पीड़ित पर ही शिकायत वापस लेने का अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है। यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और न्याय व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है।
प्रशासन से तीखे सवाल :-
क्या नवानगर थाने में न्याय की बोली लगती है?
रिश्वतखोर पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित को क्यों डराया जा रहा है?
क्या सिंगरौली पुलिस के उच्च अधिकारी इस 'रिश्वतकांड' और 'दबंगई' पर चुप्पी साधे रखेंगे?
निष्कर्ष
यह मामला केवल एक मारपीट या ₹1000 की रिश्वत का नहीं है, बल्कि यह आम आदमी के पुलिस पर से टूटते भरोसे का है। अगर उच्च अधिकारियों ने इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया, तो "देशभक्ति-जनसेवा" का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।
संवाददाता :- आशीष सोनी

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