वनरक्षक की दबंगई, पीड़ित आदिवासी को अब तक नहीं मिला इंसाफ
एक ओर जहां सरकार आदिवासियों के उत्थान और उनकी सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के मैदानी अमले की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है।
सिंगरौली जिले के चितरंगी क्षेत्र मोहगड़ी चौंकी में पदस्थ एक वनरक्षक द्वारा आदिवासी युवक के साथ बेरहमी से मारपीट करने का मामला अब प्रशासन की सुस्ती के कारण 'ठंडे बस्ते' में जाता दिख रहा है।
क्या है पूरा मामला-
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 22 सितंबर 2025 की है, जब पीड़ित बुद्धू सिंह के साथ मोहगड़ी चौकी में पदस्थ वनरक्षक शिवकुमार कुशवाहा एवं चौकीदार सीताराम कोल द्वारा पीड़ित के वन विभाग की जमीन का पीडीए करने के नाम पर चौंकी बुलाकर परिसर की साफ सफाई कराई गई और पीड़ित के साथ मां बहन की अश्लील गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की गई पीड़ित के शरीर पर चोट के निशान और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बावजूद विभाग दोषियों पर कार्रवाई करने से कतरा रहा है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन-
घटना के तुरंत बाद पीड़ित पक्ष ने पुलिस विभाग को शिकायत सौंपी थी। अधिकारियों ने त्वरित जांच और कड़ी कार्रवाई का भरोसा तो दिया, लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद भी दोषी वनरक्षक और चौकीदार अपनी ड्यूटी पर तैनात है। विभागीय सूत्रों की मानें तो रसूख और आपसी साठगांठ के चलते मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है।
इस टालमटोल वाले रवैये से स्थानीय आदिवासी समाज में भारी नाराजगी है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द ही दोषियों पर FIR दर्ज नहीं हुई या उन्हें निलंबित नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
संवाददाता :- आशीष सोनी



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