बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फिर उठे सवाल,हाईकोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी सियासी हलचल
ग्वालियर हाईकोर्ट बेंच के एक अहम फैसले के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है 9 मार्च को जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की एकलपीठ ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया यह फैसला भाजपा नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत द्वारा दायर चुनाव याचिका पर सुनाया गया इस निर्णय के बाद प्रदेश में अन्य विवादित मामलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं जिनमें बीना की विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता का मामला भी शामिल है। बीना से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने वाली विधायक निर्मला सप्रे को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद बना हुआ है कांग्रेस पार्टी ने उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है हालांकि इस मामले में अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है जिससे उनकी विधायकी पर सस्पेंस बना हुआ है।
दरअसल 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहतगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में निर्मला सप्रे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच पर नजर आई थीं इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन्हें मंच पर भाजपा का गमछा पहनाया और उनके भाजपा में शामिल होने की घोषणा की गई सप्रे ने भी कहा था कि वे बीना क्षेत्र के विकास के लिए भाजपा के साथ आई हैं हालांकि उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता नहीं ली लेकिन बाद में भाजपा प्रत्याशी लता वानखेड़े के समर्थन में चुनाव प्रचार भी किया और कांग्रेस से दूरी बना ली।
इसके बाद कांग्रेस ने इसे दलबदल का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 7 जुलाई 2024 को विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन देकर निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी करीब ढाई महीने बाद विधानसभा की ओर से जवाब मिला कि याचिका से जुड़े दस्तावेज गुम हो गए हैं इसके बाद कांग्रेस ने दोबारा दस्तावेज भेजे और कार्रवाई की मांग दोहराई।
जब 90 दिनों के भीतर विधानसभा अध्यक्ष की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया गया तो 28 नवंबर 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी अब हाईकोर्ट ने इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर राज्य सरकार और निर्मला सप्रे से जवाब मांगा है कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद यह मामला एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
संवाददाता :- स्वाति रजक

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