तहसीलदार की 'गायब' कार्यशैली से जनता त्रस्त, फाइलों का गायब करने का मास्टरमाइंड कौन?



नवगठित मऊगंज जिले की हनुमना तहसील इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था का केंद्र बनी हुई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तहसील कार्यालय में तहसीलदार की उपस्थिति 'नगण्य' बनी हुई है, जिसके कारण आम जनता न्याय और अपने जायज कार्यों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

कुर्सी खाली, जनता परेशान

हैरानी की बात यह है कि तहसीलदार न तो कार्यालय में मिलते हैं और न ही ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय समय में रहते कहां हैं? तहसील परिसर में अपने काम लेकर आने वाले ग्रामीणों का कहना है कि वे मीलों दूर से किराए खर्च कर आते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है।

फाइलों का रहस्य: तीन महीने का 'वेटिंग पीरियड'

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि तहसील कार्यालय में आवेदनों पर धूल जम रही है। कई महत्वपूर्ण फाइलें 3-3 महीने से लंबित पड़ी हैं।

गायब होती फाइलें: सूत्रों का दावा है कि कार्यालय से महत्वपूर्ण फाइलें गायब कर दी जाती हैं।

शून्य सुनवाई: राजस्व मामलों से लेकर नामांतरण और सीमांकन जैसे कार्यों के लिए जनता की सुनवाई शून्य हो चुकी है।

मास्टरमाइंड कौन? कार्यालय से फाइलों के हेरफेर और इस 'गायब' होने के खेल के पीछे आखिर कौन सा मास्टरमाइंड काम कर रहा है, यह जांच का विषय है।

अंधेरे में भविष्य और न्याय

एक ओर सरकार प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाने का दावा कर रही है, वहीं हनुमना तहसील की यह स्थिति सरकार की छवि को धूमिल कर रही है। बिना किसी पूर्व सूचना या आधिकारिक कार्य के अधिकारी का नदारद रहना प्रशासनिक अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।

"हम सुबह से साहब का इंतजार कर रहे हैं। बाबू कहते हैं मीटिंग में हैं, लेकिन पता चलता है कि मीटिंग में भी साहब नहीं पहुंचे। हमारी फाइलों का कोई अता-पता नहीं है।" 

— एक पीड़ित ग्रामीण

अब देखना यह होगा कि मऊगंज कलेक्टर इस अव्यवस्था पर क्या संज्ञान लेते हैं और क्या हनुमना की जनता को इस 'लापता' कार्यप्रणाली से मुक्ति मिलेगी?

संवाददाता :- आशीष सोनी