भारत की 2027 जनगणना: कब होगी, कैसे होगी और क्यों है यह महत्वपूर्ण


भारत में अगली राष्ट्रीय जनगणना अब 2026–27 में आयोजित की जाएगी। यह भारत की 16वीं जनगणना होगी, जिसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में घरों और उनकी सुविधाओं की जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे चरण में देश के प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ा विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा।

यह जनगणना कई कारणों से खास मानी जा रही है, क्योंकि यह डिजिटल तकनीक के माध्यम से होने वाली पहली व्यापक जनगणना होगी और भविष्य में राजनीतिक व प्रशासनिक फैसलों पर भी इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

दो चरणों में होगी जनगणना

पहला चरण: House Listing और Housing Census

पहला चरण अप्रैल 2026 से सितम्बर 2026 के बीच आयोजित होगा। इसमें देश के हर घर से जुड़ी बुनियादी जानकारी एकत्र की जाएगी।

इस दौरान अधिकारियों द्वारा घरों से जुड़े कई सवाल पूछे जाएंगे, जैसे:

घर का नंबर और मालिकाना स्थिति

घर की दीवार, छत और फर्श किस सामग्री से बने हैं

घर कच्चा है या पक्का

परिवार में कितने लोग रहते हैं

पीने के पानी का स्रोत

शौचालय की उपलब्धता

बिजली और ऊर्जा का स्रोत

रसोई ईंधन (LPG, लकड़ी आदि)

मोबाइल, इंटरनेट, टीवी या कंप्यूटर जैसी सुविधाएँ

घर में मौजूद वाहन जैसे साइकिल, मोटरसाइकिल या कार

इस चरण में आमतौर पर करीब 31 प्रश्न पूछे जाते हैं।

दूसरा चरण: Population Enumeration

जनगणना का दूसरा चरण फरवरी 2027 में आयोजित होगा। इसमें देश के प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत और सामाजिक जानकारी दर्ज की जाएगी।

इस चरण में जिन मुख्य जानकारियों को दर्ज किया जाएगा, उनमें शामिल हैं:

नाम, लिंग और उम्र

वैवाहिक स्थिति

धर्म

अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की स्थिति

मातृभाषा

शिक्षा का स्तर

रोजगार या आर्थिक गतिविधि

विकलांगता से संबंधित जानकारी

प्रवासन यानी व्यक्ति कहाँ से आया है

डिजिटल तकनीक से होगी डेटा एंट्री

2027 की जनगणना की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप और टैबलेट का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जानकारी सीधे डिजिटल रूप में दर्ज होगी। इसके अलावा डेटा एंट्री लगभग 16 भारतीय भाषाओं में की जा सकेगी।

राजनीति और प्रशासन पर असर

जनगणना के आंकड़े केवल जनसंख्या जानने के लिए ही नहीं होते, बल्कि इनका उपयोग कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में किया जाता है।

इन आंकड़ों के आधार पर सरकारें विकास योजनाएँ बनाती हैं, संसाधनों का वितरण करती हैं और कई प्रशासनिक निर्णय लिए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह जनगणना भविष्य में लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण (Delimitation) के लिए भी आधार बन सकती है। 1976 से लोकसभा सीटों की संख्या को स्थिर रखा गया है, लेकिन भविष्य में इसमें बदलाव संभव है।

2021 में होनी थी जनगणना

दरअसल भारत की पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और अगली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी।

लेकिन COVID-19 महामारी, प्रशासनिक तैयारियों और अन्य कारणों से इसे लगातार टालना पड़ा। अब सरकार ने इसे 2026–27 में कराने की योजना बनाई है।

भारत की 2027 जनगणना देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना और आर्थिक गतिविधियों की विस्तृत तस्वीर सामने लाएगी। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल के कारण यह पहले की तुलना में अधिक तेज़ और व्यवस्थित होने की उम्मीद है। साथ ही इसके आंकड़े भविष्य की नीतियों और राजनीतिक संरचना को भी प्रभावित कर सकते हैं।

संवाददाता :- कृष्णकांत कुमार