मुरैना में 11 अप्रैल को निकलेगा भव्य चल समारोह, सामाजिक समरसता का दिया जाएगा संदेश
मुरैना शहर में आज महात्मा ज्योतिराव फुले जयंती के अवसर पर भव्य चल समारोह का आयोजन किया जा रहा है। चल समारोह सुबह 11 बजे PWD रेस्ट हाउस पर एकत्रित होकर बैरियल चौराहे से प्रारंभ होगा और एम.एस. रोड, पुराना बस स्टैंड, नाला नंबर-02, गोपीनाथ की पुलिया एवं स्टेशन रोड होते हुए टाउन हॉल मुरैना में संपन्न होगा।
आयोजन के दौरान शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए सामाजिक समरसता और जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर शहर में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद भारत सिंह कुशवाह (ग्वालियर) उपस्थित रहेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक सोनेराम कुशवाह करेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व विधायक अजब सिंह कुशवाह शामिल होंगे।
इसके अलावा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व विधायक बैजनाथ सिंह कुशवाह और कमलेश कुशवाह अपने विचार व्यक्त करेंगे।
अखिल भारतीय कुशवाह महासभा जिला मुरैना ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इस आयोजन को सफल बनाएं। आयोजकों के अनुसार विभिन्न सामाजिक संगठनों की सक्रिय सहभागिता से यह कार्यक्रम सामाजिक एकता और जागरूकता का बड़ा मंच बनेगा।
महात्मा ज्योतिराव फुले जयंती: सामाजिक न्याय और शिक्षा का संदेश
भारत के महान समाज सुधारकों में अग्रणी महात्मा ज्योतिराव फुले का जीवन संघर्ष, समानता और शिक्षा के लिए समर्पित रहा। हर वर्ष उनकी जयंती समाज को उनके विचारों और कार्यों को याद करने का अवसर देती है।
महात्मा फुले ने उस दौर में सामाजिक कुरीतियों और जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई, जब समाज गहरे विभाजन में बंटा हुआ था। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना और समाज के वंचित वर्गों, खासकर महिलाओं और पिछड़े समुदायों को शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर उन्होंने देश का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया, जो उस समय एक क्रांतिकारी कदम था।
फुले ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास, छुआछूत और असमानता के खिलाफ भी संघर्ष किया। उन्होंने किसानों और श्रमिकों के अधिकारों की बात की और उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए प्रयास किए। उनकी सोच थी कि जब तक समाज के हर वर्ग को समान अवसर नहीं मिलेगा, तब तक सच्चा विकास संभव नहीं है।आज के दौर में भी महात्मा फुले के विचार बेहद प्रासंगिक हैं। जब हम शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय की बात करते हैं, तो उनके सिद्धांत हमें सही दिशा दिखाते हैं। उनकी जयंती केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपनाने और समाज में समानता स्थापित करने का संकल्प लेने का दिन है।
महात्मा ज्योतिराव फुले का जीवन हमें यह सिखाता है कि बदलाव के लिए साहस, समर्पण और निरंतर प्रयास जरूरी है। उनके आदर्शों को अपनाकर ही हम एक बेहतर और समरस समाज का निर्माण कर सकते हैं।
संवाददाता : किशोर कुशवाहा
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