रुद्राक्ष धाम में आयोजित क्षत्रिय महासभा के कन्या विवाह समारोह में 18 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना का मोर्चा संभाला अविराज सिंह ने



सामूहिक विवाह विवेकपूर्ण समाज की पहचान है और समय की आवश्यकता है। इस सफल आयोजन के बाद क्षत्रिय महासभा अगले वर्ष के अक्षय तृतीया पर्व पर समाज की 101 कन्याओं का विवाह समारोह आयोजित करेगा। यह उद्गार पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने अक्षय तृतीया के पर्व पर रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में क्षत्रिय महासभा जिला सागर द्वारा आयोजित कन्या विवाह समारोह-2026 में अपने संबोधन में व्यक्त किए। सागर जिले की क्षत्रिय समाज में इस तरह के इस पहले आयोजन में समाज की 18 कन्याओं का भव्य व्यवस्थाओं के साथ विवाह संपन्न हुआ। क्षत्रिय समाज के वरिष्ठ संरक्षक पूर्व गृह मंत्री एवं खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने परिवार सहित वर-वधु के पैर पाखरे क्षत्रिय महासभा की ओर से वरिष्ठ जनों ने सभी कन्याओं को 1 लाख 1 हजार की नगद राशि और अन्य उपहार सामग्रियां भेंट कीं।

पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ दिन पर किए गए दान, तप, जप और सत्कर्मों का फल अनंत और स्थायी होता है। इसी पुण्य पर्व पर कृष्ण-सुदामा का मिलन हुआ था, सूर्यदेव ने द्रौपदी को एक ’अक्षय पात्र’ प्रदान किया था। इसी दिन देवी पार्वती ने मां अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया था। उन्होंने बताया कि वेद व्यास और गणेशः महर्षि वेद व्यास ने इसी शुभ दिन पर भगवान श्री गणेश को ’महाभारत’ सुनाना प्रारंभ किया था। आदि शंकराचार्य ने इस दिन कनकधर स्तोत्रम की रचना की थी। 

पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि कन्या घर की लक्ष्मी और कुल का गौरव है। कन्यादान केवल एक रस्म नहीं, बल्कि माता-पिता द्वारा किया गया दुनिया का सबसे बड़ा त्याग है। वेदों में स्त्री यज्ञीय है अर्थात् यज्ञ समान पूजनीय हैं और कन्या का विवाह हजारों यज्ञ के समान माना गया है। ऋषि पाराशर ने बताया है कि कलियुग में कन्यादान ही वह एकमात्र पुण्य है जो मनुष्य के समस्त पापों का शमन कर सकता है। क्षत्रिय कुल शिरोमणि महाराणा प्रताप ने कहा था कि पुत्री का विवाह और उसका कन्यादान दान क्षत्रिय धर्म की वह मर्यादा है जो संबंधों को अटूट बनाती है। ’कन्यादान’ को संसार के समस्त दानों में सर्वश्रेष्ठ और ’महादान’ माना गया है, क्योंकि इसमें केवल वस्तु का नहीं बल्कि जीवन की सबसे प्रिय पूंजी (संतान) का दान किया जाता है। उन्होंने कहा कि हथेली पर रखकर कलेजा जो सौंप दे, उस पिता के साहस का नाम है कन्यादान। यह कार्य केवल एक पिता ही कर सकता है, इसीलिए इसे शास्त्रों में ’अश्वमेध यज्ञ’ से भी बड़ा फल देने वाला बताया गया है। 

पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि अपनी बेटी की शादी में लाखों खर्च कर वाह-वाही लूटने से बेहतर है कि वह धन उसके भविष्य के काम आए। सामूहिक विवाह सम्मेलन विवेकपूर्ण समाज की पहचान हैं। साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद ने लिखा है कि कर्ज लेकर विवाह करना अपनी गरिमा को गिरवी रखना है और सामूहिक विवाह सम्मान का मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज के व्यस्तताओं से भरे युग में क्षत्रिय समाज में सामूहिक विवाह समारोह बड़ी आवश्यकता बनते जा रहे हैं। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि अगले वर्ष अक्षय तृतीया पर्व पर ही क्षत्रिय महासभा जिला सागर के अगले कन्या विवाह समारोह-2027 की घोषणा करते हुए कहा है कि अगले वर्ष क्षत्रिय समाज की 101 कन्याओं का और भी भव्य और बड़े आयोजन के साथ विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा। पूर्व गृहमंत्री खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह और समाज के सभी वरिष्ठ सदस्यों ने समाज के उन सभी लोगों का मंच से प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मान किया जिन्होंने इस आयोजन में आर्थिक तथा सामग्री के रूप में सहयोग दिया। इन सभी सहयोगकर्ताओं के नामों और सहयोग राशि की सूची को पुस्तिका रूप में आयोजन स्थल पर सभी को वितरित किया गया तथा मंच से पढ़ा गया। इस आयोजन के लिए समाज जनों की ओर से सहयोग के रूप में लगभग 40 लाख रुपए की सहयोग राशि एकत्रित हुई है। 

ऐसे में क्षत्रिय महासभा जिला सागर की इस पहल को एक बड़ी शुरुआत माना जा रहा है। इस विवाह समारोह के लिए रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में आलीशान व्यवस्थाएं और सुविधाएं जुटाई गईं। सामने स्टेडियम में बारात उठाने के लिए जनवासा था। यहां से डीजे, आतिशबाजी,दुददुल घोड़ी, गाजे बाजे के साथ घुड़बग्घी, घोड़े पर हर दूल्हे की बारात लगी। सामने रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में विवाह स्थल पर  समाज के वरिष्ठ जन द्वारचार के लिए मौजूद थे। 18 ब्लाक्स में सभी 18 जोड़ों, वर वधु के लिए उनका अलग विवाह मंडप था जिन पर वर-वधु के नाम के फ्लेक्स लगे थे। आम के पत्तों और सभी पारंपरिक रिवाजों के अनुसार निर्धारित वृक्षों की लकड़ियों से बनाए मड़वे और खाम, पंडित जी, नेंग दस्तूर के लिए आवश्यक लोग सभी उपलब्ध कराए गए थे। वधुओं को सजाने और वर माला के लिए मंच पर लाने का काम क्षत्रिय महासभा की महिला विंग की अध्यक्ष श्रीमती प्रीति सिंह और उनकी टीम ने संभाला हुआ था। मंच के साइड में आर्केस्ट्रा पार्टी का अलग मंच था। वरमाला के बाद प्रत्येक वर-वधु को समाज के वरिष्ठ जनों ने जाल में सजा कर एक लाख एक हजार की राशि से तिलक किया। क्षत्रिय समाज के अनेक परिवारों ने कूलर, डिनर सेट, साड़ी आदि सामग्री भेंट में दीं। कन्याओं की पांव पखराई की पारंपरिक रस्म में भी समाज जनों ने हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर सुबह से ही स्वल्पाहार की व्यवस्था थी और दोपहर एक बजे से पांच बजे तक सभी के लिए भोजन की व्यवस्था रखी गई। इतना ही नहीं विदाई के टिपारे और सभी बारातियों घरातियों के लिए भोजन सामग्री की पठौनी रखी गई थी। व्यवस्थाओं में कोई चूक नहीं रहे इसलिए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में , महासभा के अध्यक्ष लखन सिंह के नेतृत्व में समाज जनों की विभिन्न टीमों को जिम्मेदारियों का विभाजन किया गया था इसलिए इतना बड़ा आयोजन बड़ी ही सुविधा और सुगमता के साथ संपन्न हुआ, कार्यक्रम का संचालन अभिषेक सिंह गौर और राहुल सिंह चौरा ने किया। आयोजन में हजारों की संख्या में क्षत्रिय समाज के गणमान्यों की उपस्थिति रही।

अविराज सिंह ने कहा कि सामूहिक विवाह सम्मेलन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में समरसता, सादगी और बेटियों के सम्मान का सशक्त संदेश है। सनातन परंपरा में कन्या को साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना है और उसका सम्मान तथा सुयोग्य वर को समर्पण किसी यज्ञ की पूर्णाहुति के समान पुण्यदायी होता है। अक्षय तृतीया जैसे पावन अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम समाज को एक नई दिशा देने वाला है, जिसमें शासन और समाज मिलकर बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं। उन्होंने अक्षय तृतीया का दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि अक्षय का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। उन्होंने कहा कि कन्यादान केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि माता-पिता के त्याग, संस्कार और भावनाओं की पराकाष्ठा है। एक शिक्षित और संस्कारी बेटी दो परिवारों के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। अपनी बेटी की शादी में अनावश्यक खर्च करने के बजाय उसके भविष्य के लिए धन सुरक्षित रखना अधिक उचित है और सामूहिक विवाह सम्मेलन इसी विवेकपूर्ण सोच का प्रतीक है। कार्यक्रम के दौरान अविराज ने परंपरा अनुसार वर-वधुओं के पैर पखारे तथा डोली उठाकर सामाजिक सहभागिता और सम्मान का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनकी मां सरोज सिंह भी मौके पर मौजूद रहीं। इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष खुरई राहुल चौधरी, मंडल अध्यक्ष धनौरा राजपाल सिंह , देशराज यादव, अजीत सिंह, बलराम यादव, इंद्राराज सिंह ठाकुर, नीतिराज पटेल, एसडीएम मनोज चौरसिया, सीएमओ राजेश मेहतेले सहित सभी विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।


संवाददाता- कुणाल कुर्मी