परिजन के अनुसार, 5 अप्रैल 2026 को बच्ची को हल्का बुखार और सुस्ती की शिकायत थी, जिसके चलते माता-पिता उसे शहर के निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने इसे सामान्य बीमारी बताते हुए इलाज शुरू किया, कुछ जांच कराईं और दवाइयां देकर भर्ती कर लिया। परिजन ने आरोप लगाया कि, इलाज के दौरान बच्ची को कई इंजेक्शन लगाए गए। इसके बाद उसी शाम उन्हें घर रवाना कर दिया। लेकिन, रातभर में बच्ची की हालत और बिगड़ गई, जिसके चलते अगले दिन 6 अप्रैल को परिजन बच्ची को फिर अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजन के मुताबिक, बच्ची को अब सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, फिर भी डॉक्टर संदीप ने उसे सामान्य बताकर दोबारा उन्हें घर भेज दिया।
रातभर में अचेत हो गई बच्ची- आरोप
घर लाने के बाद लगातार बच्ची की हालत बिगड़ती गई। रातभर में उसकी तबीयत इस कदर बिगड़ी कि, 7 अप्रैल तक बच्ची अचेत हो गई। इसके बाद परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से गंभीर हालत में उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
आईसीयू में जंग हारी जिंदगी
परिजन जब बच्ची को जबलपुर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे तो वहां उसे आईसीयू में भर्ती कर वेंटिलेटर लगाया गया, दो दिन वेंटिलेटर पर रहने और डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद 9 अप्रैल को उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन ने झिरना मुक्तिधाम में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
शिकायत के बाद खुली कब्र, हुआ पोस्टमार्टम
मामले में संदेह जताते हुए घर वालों ने सीएमएचओ, कलेक्टर और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एसडीएम कोर्ट की अनुमति मिलने पर बुधवार को पुलिस और तहसीलदार की मौजूदगी में शव को दोबारा कब्र से बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। यहां शव का पोस्टमार्टम किया गया है।
रिपोर्ट के इंतजार में पुलिस
मामले को लेकर कोतवाली थाना प्रभारी गौरव चाटे का कहना है कि, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस मामले की जांच की जा रही है।
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