सिंगरौली में 90 लाख का भवन जर्जर, दीवारों-छत में दरारें, हैंडओवर अटका


विकासखंड के ग्राम पंचायत खैरा अंतर्गत फुलकेश गांव में वर्ष 2022-23 में एनसीएल अमलोरी परियोजना द्वारा सीएसआर मद से करीब 90 लाख रुपये की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण पूरा हुए लगभग तीन साल होने जा रहे है, लेकिन आज तक इसे ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत या जिला पंचायत को हैंडओवर नहीं किया गया।

ग्रामीणों के अनुसार हैंडओवर से पहले ही भवन की दीवारों, छत और कोनों में जगह-जगह चौड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। उनका कहना है कि ऐसा कोई हिस्सा नहीं बचा है, जहां दरारें न दिख रही हों। आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई और गुणवत्ता मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि भवन में न तो समुचित पुताई कराई गई, न मोटर डाली गई, जिसके कारण पानी की टंकी केवल शोपीस बनकर रह गई है। इसके अलावा बिजली कनेक्शन तक नहीं कराया गया, जिससे पंखे और बल्ब भी नहीं लगाए जा सके। नल और अन्य फिटिंग कार्य भी अधूरे पड़े हैं, जिस पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब यह सब बजट में शामिल था तो कार्य पूरा क्यों नहीं कराया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और एनसीएल अमलोरी परियोजना के अधिकारियों की मिलीभगत से निम्न गुणवत्ता का निर्माण कराया गया। यही वजह है कि अब भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसे ग्राम पंचायत को हैंडओवर करने से भी बचा जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच हुई तो पूरे मामले में कमीशनखोरी और अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
   
सामुदायिक भवन निर्माण में भ्रष्टाचार की बू
सामुदायिक भवन निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और संविदाकार की मिलीभगत से निर्माण कार्य में जमकर अनियमितताएं बरती गई हैं, जिससे शासन की राशि का दुरुपयोग हुआ है। बताया जा रहा है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जबकि कागजों में उच्च गुणवत्ता दर्शाकर भुगतान निकाल लिया गया। निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें पड़ने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में सांठगांठ के चलते व्यारा-न्यारा किया गया है, जिससे सरकारी धन की खुली लूट हुई है। यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। 

कई जगह टूटी है टाइल्स ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भवन के बाहर लगी टाइल्स भी कई स्थानों पर टूट चुकी हैं और बारिश के समय छत से पानी टपकता है, जिससे भवन की उपयोगिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है। उनका कहना है कि यह भवन क्षेत्रीय जरूरतों और ग्रामीणों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन सांसद रीति पाठक तथा क्षेत्रीय विधायक अमर सिंह के प्रयासों से स्वीकृत हुआ था,

लेकिन अधिकारियों की कथित अकर्मण्यता के कारण आज तक इसका लोकार्पण तक नहीं हो सका। स्थानीय ग्रामीणों ने कलेक्टर का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि उक्त भवन की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। गांव में यह मामला अब जनचर्चा का विषय बना हुआ है और लोग इसे सार्वजनिक धन की बर्बादी बता रहे हैं। 

संवाददाता:–आशीष सोनी