मोहन यादव का बंगाल भाषण, उमंग सिंह ने पूछा – ‘हमारी बहनें कहां हैं?’
भोपाल/बांकुरा: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में भाजपा प्रत्याशियों के नामांकन और प्रचार के लिए पहुंचे। मंच से उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार पर तीखे आरोप लगाए। उनका कहना था कि बंगाल में युवा बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, पलायन बढ़ रहा है और बांग्लादेशी घुसपैठियों को फायदा मिल रहा है। उन्होंने इसे केवल चुनाव नहीं बल्कि धर्मयुद्ध तक बता दिया।
डॉ. यादव ने यह भी दावा किया कि ममता बनर्जी ने 77 ओबीसी समुदायों में मुस्लिम जातियों को शामिल किया, जबकि हिंदुओं को नजरअंदाज किया। उनका कहना था कि बंगाल के लोग बदलाव के लिए खड़े हो गए हैं और भाजपा को सत्ता में लाने का संकल्प ले चुके हैं। उन्होंने बांकुरा जिले की पांच विधानसभा सीटों से उम्मीदवारों के नामांकन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
इसी बीच, कांग्रेस नेता उमंग सिंह ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री मोहन यादव का वीडियो पोस्ट किया और कैप्शन में लिखा:
"मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनें आज गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दर-दर भटक रही हैं, और मुख्यमंत्री बंगाल में ‘दीदी’ और ‘आपी’ का फर्क समझाकर धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। अपने ही प्रदेश की महिलाएं इस संकट में अपने मुख्यमंत्री को ढूंढ रही हैं, लेकिन उनका ध्यान जमीनी समस्याओं से ज्यादा बाहर की राजनीति में लगा है।"
इस प्रतिक्रिया से साफ होता है कि मध्य प्रदेश की जनता अपनी रोजमर्रा की समस्याओं, जैसे गैस सिलेंडर, रोजगार और सुरक्षा, को लेकर चिंतित है, जबकि नेताओं का ध्यान राजनीतिक मंचों और बयानबाजी पर केंद्रित है।
बंगाल की राजनीति की बात करें तो 15 साल से सत्ता में रही ममता बनर्जी पर आरोप हैं कि उनके शासन में बेरोजगारी बढ़ी, युवा पलायन को मजबूर हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक रही। बंगाल में हिन्दू समुदायों की उपेक्षा और बाहरी घुसपैठियों के मुद्दों ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है।
मध्य प्रदेश और बंगाल की इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि जनता की असली जरूरतों और नेताओं की प्राथमिकताओं के बीच खाई बनी हुई है। मध्य प्रदेश की महिलाएं अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रही हैं, युवा रोजगार की तलाश में परेशान हैं और आम लोग अपने अधिकार और सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
संवाददाता -: स्वाति रजक

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