भाजपा नेता के होटल में देह व्यापार कांड की पीड़िता को मिली जान से मारने की धमकी
बहुचर्चित होटल 'अतिथि' देह व्यापार कांड में एक सनसनीखेज मोड़ सामने आया है, जहाँ अब रसूखदारों द्वारा कानून को ठेंगा दिखाने की कोशिश की जा रही है. अब जबकि मामला कोर्ट में ट्रायल की दिशा में बढ़ रहा है, आरोपियों की ओर से गवाहों और पीड़िता को डराने-धमकाने का गंदा खेल शुरू हो गया है. असम की मूल निवासी पीड़िता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे किए हैं. पीड़िता ने बताया कि उसे पिछले कई दिनों से अनजान नंबरों से फोन आ रहे हैं और कुछ अज्ञात लोग लगातार उसका पीछा कर रहे हैं. इस मामले की गंभीरता और पीड़िता की जान पर मंडराते खतरे को देखते हुए जबलपुर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से आरोपियों के परिजनों के खिलाफ धमकियां देने और साक्ष्यों को प्रभावित करने की धाराओं के तहत एक नया मामला दर्ज कर लिया है.
यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ था जब पुलिस ने मदन महल थाना क्षेत्र स्थित होटल 'अतिथि' पर छापा मारकर एक अंतरराष्ट्रीय देह व्यापार गिरोह का भंडाफोड़ किया था. इस कांड का मुख्य केंद्र रहे होटल का सीधा संबंध तत्कालीन भाजपा नेता से होने के कारण पूरे प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया था. उस समय पुलिस ने खुलासा किया था कि असम और पूर्वोत्तर के राज्यों से भोली-भाली लड़कियों को अच्छी नौकरी का लालच देकर जबलपुर लाया जाता था और फिर उन्हें होटल के कमरों में बंधक बनाकर इस घिनौने व्यापार में धकेल दिया जाता था. इस मामले में पुलिस ने कई रसूखदारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और राजनीतिक दबाव के बाद भाजपा ने संबंधित नेता को पार्टी से निष्कासित भी कर दिया था.
महीनों पुरानी इस घटना में अब जब न्याय की घड़ी नजदीक आई है और कोर्ट में सुनवाई (ट्रायल) की प्रक्रिया तेज हुई है, तो आरोपियों के हौसले फिर बुलंद होते दिख रहे हैं. पीड़िता का आरोप है कि आरोपी पक्ष के परिवार वाले उस पर समझौते के लिए भारी दबाव बना रहे हैं. उसे खुलेआम कहा जा रहा है कि यदि उसने बयान नहीं बदले तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. पीड़िता ने अपनी शिकायत में कुछ संदिग्ध वाहनों के नंबर भी पुलिस को सौंपे हैं जो उसके घर के बाहर मंडराते देखे गए हैं. पुलिस की नई एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि आरोपियों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने और गवाहों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
पुलिस प्रशासन ने अब इस मामले में तकनीकी साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिए हैं. जिन नंबरों से धमकियां दी गई हैं, उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाली जा रही है. साथ ही, पीड़िता के निवास स्थान के आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं ताकि पीछा करने वाले संदिग्धों की पहचान की जा सके. शहर के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि रसूख का इस्तेमाल कर गवाहों को डराने वाले आरोपियों की जमानत रद्द कराने के लिए भी कोर्ट में आवेदन दिया जा सकता है. इस ताजा अपडेट ने एक बार फिर जबलपुर के गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या एक रसूखदार गिरोह के खिलाफ एक बाहरी राज्य की लड़की को इंसाफ मिल पाएगा. फिलहाल पुलिस पीड़िता को सुरक्षा देने की तैयारी कर रही है और आरोपियों के करीबियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया गया है.
संवाददाता :- आशीष सोनी

0 Comments